उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार सुबह उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब प्रशासन ने सिविल कोर्ट परिसर के बाहर बने वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी, नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और सड़क किनारे बने कई चैंबरों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी, इस दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौके पर जमा हो गए और कार्रवाई का विरोध करते हुए नारेबाजी और प्रदर्शन शुरू कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला पुराने हाई कोर्ट और स्वास्थ्य भवन चौराहे के बाहर बने वकीलों के चैंबरों से जुड़ा हुआ है, वर्षों से यहां अधिवक्ता छोटे-छोटे चैंबर बनाकर अपने मुवक्किलों से मुलाकात और केस से संबंधित कामकाज करते थे, सोमवार सुबह अचानक नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और बुलडोजर के जरिए निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी, प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध अतिक्रमण हटाने के तहत की गई है और कोर्ट के आदेश के अनुसार चैंबर हटाना जरूरी था।
वकीलों ने लगाए गंभीर आरोप
कार्रवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। वकीलों का कहना है कि हाई कोर्ट ने केवल 72 चैंबर हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन प्रशासन ने उसी आदेश की आड़ में करीब 240 चैंबरों को ध्वस्त कर दिया, अधिवक्ताओं का आरोप है कि बिना पर्याप्त नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक कार्रवाई किए जाने से उनके कामकाज पर सीधा असर पड़ा है, कई वकीलों ने इसे “रोजगार पर हमला” बताते हुए प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन और भारी पुलिस बल की तैनाती
बुलडोजर कार्रवाई के दौरान मौके पर जमकर हंगामा हुआ। अधिवक्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कार्रवाई रोकने की मांग की। हालात को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात कर दिया। कुछ समय के लिए कोर्ट परिसर और आसपास का इलाका तनावपूर्ण बना रहा।
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प्रशासन का पक्ष
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और सड़क किनारे अवैध कब्जे हटाना आवश्यक था, अधिकारियों के मुताबिक शहर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई हालांकि, अधिवक्ताओं का सवाल अब भी कायम है कि यदि कोर्ट ने सीमित संख्या में चैंबर हटाने का आदेश दिया था, तो उससे कहीं ज्यादा निर्माण क्यों गिराए गए।
आगे क्या?
फिलहाल अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन जारी है, वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा, दूसरी ओर प्रशासन अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रहा है, इस पूरे घटनाक्रम के बाद लखनऊ कोर्ट परिसर के आसपास का माहौल अब भी संवेदनशील बना हुआ है और पुलिस लगातार निगरानी कर रही है।





