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योगी सरकार का ‘गो-इकोनॉमी मॉडल’ बना ग्लोबल ब्रांड, विदेशों तक पहुंच रहे यूपी के गो-उत्पाद

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उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath सरकार का ‘गो संरक्षण से समृद्धि’ मॉडल अब केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। देशी गायों के संरक्षण को आर्थिक विकास और रोजगार से जोड़ने वाली यह पहल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना रही है। योगी सरकार ने गो-संरक्षण को सिर्फ धार्मिक आस्था का विषय न मानते हुए इसे एक मजबूत आर्थिक मॉडल में बदलने की दिशा में काम किया है, जिसका असर अब जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है।

उत्तर प्रदेश में तैयार किए जा रहे गो-आधारित उत्पादों की मांग अब भारत के बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। राज्य में बने उत्पाद अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दुबई और यूरोप समेत 10 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। “मेड इन यूपी” ब्रांड के तहत तैयार हो रहे इन उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है। इससे उत्तर प्रदेश की छवि एक उभरते हुए “गो-इकोनॉमी मॉडल” वाले राज्य के रूप में मजबूत हो रही है।

इस मॉडल की शुरुआत गाजियाबाद के सिकंदरपुर क्षेत्र से हुई, जहां असीम रावत ने कॉर्पोरेट दुनिया की नौकरी छोड़कर गो-संरक्षण और ऑर्गेनिक डेयरी सेक्टर में कदम रखा। अमेरिका की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में करीब 14 वर्षों तक काम करने के बाद उन्होंने ‘HETHA’ ब्रांड की स्थापना की। इसके तहत 1000 से अधिक देशी गायों पर आधारित एक आधुनिक और एथिकल डेयरी मॉडल तैयार किया गया।

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आज यह मॉडल न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। इस पहल के जरिए करीब 100 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi भी साहीवाल नस्ल की गायों को बढ़ावा देने की सराहना कर चुके हैं।

इस गो-इकोनॉमी मॉडल के तहत केवल दूध उत्पादन तक ही सीमित काम नहीं हो रहा, बल्कि पंचगव्य, आयुर्वेदिक दवाइयां, ऑर्गेनिक फूड, स्किन केयर और हेयर केयर से जुड़े करीब 150 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत और गोमूत्र अर्क जैसे उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशेष मांग है।

इस मॉडल की एक बड़ी खासियत यह भी है कि यहां बूढ़ी और दूध न देने वाली गायों को बोझ नहीं माना जाता। उन्हें भी संरक्षण प्रणाली का हिस्सा बनाकर रखा जाता है और उनके जरिए जैविक खाद तथा अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इससे गो-संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा रही है।

योगी सरकार इस मॉडल को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है। पशुपालन विभाग की ‘ऑपरेशन-4’ योजना के तहत देशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। योजना के अनुसार 15 प्रतिशत राशि लाभार्थी को स्वयं लगानी होती है, जबकि 35 प्रतिशत बैंक ऋण और बाकी 50 प्रतिशत सरकारी अनुदान के रूप में दिया जाता है।

सरकार विशेष रूप से साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी देशी नस्लों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का यह “गो-इकोनॉमी मॉडल” आने वाले समय में राज्य को वैश्विक डेयरी और ऑर्गेनिक उत्पाद बाजार में नई पहचान दिला सकता है। साथ ही यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक खेती और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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