दक्षिण भारतीय राजनीति में इन दिनों दो बड़े फिल्मी सितारों से नेता बने चेहरों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है — Pawan Kalyan और Vijay। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में विजय की ऐतिहासिक जीत के बाद अब दूसरे राज्यों के नेता भी उनकी राजनीतिक सफलता पर खुलकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसी बीच आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जनसेना पार्टी प्रमुख पवन कल्याण का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसमें उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि विजय की तेज राजनीतिक सफलता को देखकर उन्हें “थोड़ी जलन” होती है।
दरअसल, सोमवार 25 मई 2026 को आयोजित एक कार्यक्रम में पवन कल्याण ने अपनी राजनीतिक यात्रा, संघर्ष और पार्टी निर्माण के अनुभवों पर खुलकर बात की। इसी दौरान उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति का जिक्र करते हुए मुस्कुराते हुए कहा, “तमिलनाडु की राजनीति को देखकर लगता है कि वहां सब कुछ बहुत आसानी से हो गया। उन्होंने कटआउट और होलोग्राम के जरिए खुशी-खुशी चुनाव जीत लिया… उन्हें देखकर थोड़ी जलन होती है।”
हालांकि पवन कल्याण ने यह बात हल्के-फुल्के अंदाज में कही, लेकिन उनके शब्दों में लंबे संघर्ष का दर्द भी साफ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में पार्टी बनाना, उसे खड़ा करना और जनता का भरोसा जीतना आसान नहीं होता। इसके लिए सालों तक जमीन पर मेहनत करनी पड़ती है।
पवन कल्याण ने बताया कि उन्होंने पिछले 15 वर्षों तक लगातार संघर्ष किया है। गांव-गांव जाकर लोगों से मिले, संगठन को मजबूत किया और धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। उन्होंने कहा, “राजनीति में लाखों लोगों को एक विचारधारा के साथ जोड़ना बहुत बड़ी चुनौती होती है। कई बार परिवार के लोग भी एक राय पर नहीं होते, ऐसे में पार्टी को मजबूत करना आसान नहीं होता।”
उनके इस बयान को लोग उनकी ईमानदारी और संघर्ष की कहानी से जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने कहा कि पवन कल्याण ने बिना किसी दिखावे के अपनी भावनाएं जाहिर कीं, इसलिए लोग उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं।
वहीं दूसरी ओर विजय ने बेहद कम समय में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ी सफलता हासिल कर ली। उन्होंने साल 2024 में अपनी पार्टी टीवीके (TVK) की शुरुआत की थी और 2026 विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज की। इस जीत के साथ विजय राज्य के मुख्यमंत्री बने और उन्होंने लंबे समय से राजनीति पर पकड़ बनाए हुए DMK और AIADMK जैसी पार्टियों को कड़ी चुनौती दी।
पवन कल्याण की राजनीतिक यात्रा विजय से बिल्कुल अलग रही है। उन्होंने 2014 में जनसेना पार्टी की स्थापना की थी, लेकिन शुरुआती चुनावों में उन्हें खास सफलता नहीं मिली। 2019 विधानसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली थी और पवन खुद दोनों सीटों से हार गए थे। उस समय राजनीतिक विश्लेषकों ने उनकी राजनीति को खत्म मान लिया था।
लेकिन पवन कल्याण ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार संगठन पर काम किया और बाद में N. Chandrababu Naidu की टीडीपी और बीजेपी के साथ गठबंधन किया। 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनसेना पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और जिन 21 सीटों पर चुनाव लड़ा, उन सभी पर जीत हासिल की। पवन कल्याण ने भी पीठापुरम सीट से बड़ी जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।
अब पवन कल्याण का यह बयान दक्षिण भारत की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। कुछ लोग इसे उनकी सादगी और साफगोई बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे विजय की तेजी से बढ़ती राजनीतिक ताकत से जोड़कर देख रहे हैं। इतना तय है कि फिल्मों से राजनीति में आए ये दोनों सितारे अब दक्षिण भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो चुके हैं।






