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बाहुबली विधायक अनंत सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, गोपालगंज पुलिस ने जोड़ीं BNS की दो और गंभीर धाराएं

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बिहार की राजनीति में चर्चित बाहुबली विधायक Anant Singh की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। गोपालगंज पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की दो और गंभीर धाराएं जोड़ने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की है। इनमें धारा 111 और धारा 196 शामिल हैं, जिन्हें गैर-जमानती धाराओं की श्रेणी में माना जाता है। पुलिस का कहना है कि मामला केवल हथियार लहराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संगठित अपराध और सामाजिक वैमनस्य फैलाने जैसे गंभीर पहलू भी सामने आए हैं।

जानकारी के अनुसार BNS की धारा 111 संगठित अपराध से संबंधित है, जबकि धारा 196 धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने और सामाजिक माहौल बिगाड़ने से जुड़ी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत इन धाराओं को केस में शामिल करने की अनुमति देती है और आरोप साबित हो जाते हैं, तो अनंत सिंह को 10 साल तक की सजा हो सकती है। ऐसे में उनके लिए अग्रिम जमानत हासिल करना और अधिक कठिन हो सकता है।

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फिलहाल MP-MLA कोर्ट ने अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर 30 मई तक रोक लगा रखी है। मामले की अगली सुनवाई भी 30 मई को निर्धारित की गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अदालत उन्हें राहत देती है या उनकी मुश्किलें और बढ़ती हैं।

इस पूरे मामले में अनंत सिंह की ओर से पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता कुमार हर्षवर्द्धन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विधायक का नाम बिना ठोस सबूत के इस मामले में जोड़ा गया है। उन्होंने अदालत में दलील दी कि पुलिस ने राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की है। इसी आधार पर कोर्ट ने फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी।

पूरा मामला गोपालगंज जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमरांव गांव से जुड़ा हुआ है। 2 और 3 मई को यहां भोजपुरी गायक Gunjan Singh के घर आयोजित जनेऊ कार्यक्रम में अनंत सिंह शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों द्वारा हथियार लहराने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अनंत सिंह, गुंजन सिंह समेत कुल 9 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

इसके बाद गोपालगंज पुलिस ने विधायक और उनके समर्थकों को नोटिस जारी कर 15 मई तक हथियारों और लाइसेंस के साथ उपस्थित होने को कहा था, ताकि हथियारों की बैलिस्टिक जांच कराई जा सके। हालांकि तय समय तक कोई भी जांच में शामिल नहीं हुआ। पुलिस का कहना है कि इसी के बाद मामले की गंभीरता बढ़ी और नई धाराएं जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।

मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष जहां इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मामला बता रहा है, वहीं अनंत सिंह समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रहे हैं। आने वाली 30 मई की सुनवाई इस मामले में बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि उसी दिन अदालत यह तय करेगी कि विधायक को राहत मिलेगी या फिर उनके खिलाफ कार्रवाई और सख्त होगी।