उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के निर्देश पर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए एंटी-कन्वर्जन सेल गठित किए जाएंगे। हाल के दिनों में सामने आए कुछ मामलों को देखते हुए सरकार ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए नई गाइडलाइन जारी की है।
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इस निर्णय पर शिक्षाविदों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई शिक्षकों ने इसका स्वागत किया है, जबकि कुछ लोगों ने इसे अप्रत्याशित कदम बताया है।काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्रा ने इस फैसले को उचित बताते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसा वातावरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जहां किसी भी धार्मिक विषय के कारण छात्रों का कोई वर्ग प्रभावित न हो। उनके अनुसार, यह व्यवस्था छात्रों को अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों से जुड़े रहने तथा सुरक्षित माहौल में अपनी पहचान और परंपराओं के साथ आगे बढ़ने में मदद करेगी।जब उनसे पूछा गया कि क्या शिक्षण संस्थानों में धार्मिक प्रभाव की समस्या वास्तव में मौजूद है, तो उन्होंने कहा कि इसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि कुछ मामलों में धार्मिक विचारों को अनुचित तरीके से बढ़ावा देने या थोपने की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में एंटी-कन्वर्जन सेल संभावित विवादों और शिकायतों की रोकथाम में सहायक साबित हो सकते हैं।फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह विषय राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन सकता है।






