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नाटक के माध्यम से वनवासी बालिकाओं ने दिया मंदाकिनी बचाने का संदेश, चित्रकूट में गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

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चित्रकूट। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी चित्रकूट में आयोजित एक माह के ग्रीष्मकालीन नेतृत्व विकास शिविर के समापन समारोह में वनवासी बालिकाओं ने पर्यावरण संरक्षण और नदी स्वच्छता का प्रभावशाली संदेश दिया। अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिभागी बालिकाओं ने “मां मंदाकिनी की करुण पुकार” नामक नाट्य मंचन प्रस्तुत कर नदी प्रदूषण और अतिक्रमण जैसी गंभीर समस्याओं पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

नाटक के माध्यम से दिखाई मंदाकिनी की पीड़ा

बालिकाओं ने अपने नाटक में दर्शाया कि किस प्रकार शौचालयों का गंदा पानी, प्लास्टिक कचरा, घरेलू अपशिष्ट, नदी तटों पर बढ़ता अतिक्रमण, कपड़े धोना और नदी को बांधने-पाटने जैसी गतिविधियां मंदाकिनी नदी के अस्तित्व के लिए खतरा बनती जा रही हैं। नाट्य प्रस्तुति के जरिए यह संदेश दिया गया कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो चित्रकूट क्षेत्र को भविष्य में गंभीर जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

स्वच्छ और अविरल मंदाकिनी के लिए सुझाए समाधान

नाटक में केवल समस्याओं को ही नहीं उठाया गया, बल्कि नदी को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए। बालिकाओं ने लोगों से अपील की कि वे नदी में कूड़ा-कचरा न डालें, प्लास्टिक के उपयोग को कम करें और नदी तटों पर अतिक्रमण रोकने में सहयोग करें।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

समारोह के दौरान शिविर में प्रशिक्षित बालिकाओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां भी दीं। कथक नृत्य, लोकगीत तथा बुंदेलखंड के पारंपरिक लोकनृत्य राई, कोल्हाई और बलमा ने दर्शकों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

एक माह के प्रशिक्षण की दी जानकारी

शिविर व्यवस्थापिकाओं भारती और संध्या ने बालिकाओं को दिए गए एक माह के प्रशिक्षण की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि शिविर का उद्देश्य नेतृत्व क्षमता विकसित करना, सामाजिक जागरूकता बढ़ाना और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना था।

कार्यक्रम का संचालन रीना सिंह ने किया।

कई गणमान्य अतिथि रहे मौजूद

समापन समारोह में कामतानाथ मुखारविंद के महंत मदनगोपाल दास, महिला महाविद्यालय बस्ती की डॉ. प्रियंका, पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्रा, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष पंकज अग्रवाल सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

पर्यावरण संरक्षण का दिया मजबूत संदेश

इस आयोजन ने यह साबित किया कि समाज में जागरूकता फैलाने के लिए कला और संस्कृति एक प्रभावी माध्यम हैं। वनवासी बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत नाटक ने मंदाकिनी नदी संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए लोगों को पर्यावरण बचाने के लिए प्रेरित किया।