चित्रकूट। विश्व रक्तदाता दिवस 2026 के अवसर पर चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए स्वयं रक्तदान कर एक एनीमिया पीड़ित बच्चे को नया जीवन देने का कार्य किया। उनकी इस संवेदनशील पहल की जिलेभर में सराहना हो रही है और लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरणा मिल रही है।
एनीमिया से जूझ रहे बच्चे के लिए डीएम ने किया रक्तदान
जिला संयुक्त चिकित्सालय, चित्रकूट में आयोजित विश्व रक्तदाता दिवस रक्तदान शिविर के दौरान अस्पताल अधीक्षक ने जिलाधिकारी को जानकारी दी कि ग्राम खड़ेहा निवासी श्यामसुंदर के आठ वर्षीय पुत्र दीपक को गंभीर एनीमिया है और उसे तत्काल O-पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीएम पुलकित गर्ग ने बिना किसी देरी के स्वयं रक्तदान करने का निर्णय लिया। उनके रक्तदान से बच्चे को समय पर रक्त उपलब्ध हो सका, जिससे उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण मदद मिली।
डीएम की पहल से भावुक हुए लोग
जिलाधिकारी की इस मानवीय पहल ने रक्तदान शिविर में मौजूद चिकित्सकों, कर्मचारियों और आम लोगों को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने डीएम के इस कदम को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।रक्तदान के बाद जिलाधिकारी ने स्वैच्छिक रक्तदाताओं, सामाजिक संस्थाओं और रक्तदान जागरूकता अभियान में योगदान देने वाले विभागों को सम्मानित करते हुए प्रमाण पत्र वितरित किए।
नियमित रक्तदान की दिलाई गई शपथ
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और अधिकारियों को नियमित रक्तदान करने तथा अन्य लोगों को इसके लिए प्रेरित करने की शपथ दिलाई गई।इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह, जिला संयुक्त चिकित्सालय के अधीक्षक, चिकित्सकगण, स्वास्थ्य कर्मचारी एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
क्यों मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस?
हर वर्ष 14 जून को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day) मनाया जाता है। यह दिन नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है, जिन्होंने ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज की थी।
World Blood Donor Day 2026 Theme
“Giving Blood is an Act of Solidarity – Join the Effort and Save Lives”
अर्थात, “रक्तदान एक एकजुटता का कार्य है – इस प्रयास में शामिल हों और जीवन बचाएं।”
एक यूनिट रक्तदान बचा सकता है तीन जिंदगियां
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एक यूनिट रक्तदान से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। भारत में हर वर्ष लगभग 1.5 करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, जबकि उपलब्धता अपेक्षाकृत कम रहती है। यही कारण है कि स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।
समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश
चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग द्वारा किया गया यह रक्तदान न केवल एक बच्चे के लिए जीवनदायी साबित हुआ, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि रक्तदान सबसे बड़ा मानव सेवा का कार्य है। यदि अधिक से अधिक लोग स्वेच्छा से रक्तदान करें, तो हजारों जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सकती है।






