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राम मंदिर चढ़ावा विवाद से बीजेपी पर डबल अटैक! अखिलेश ने पहले उठाया सवाल, फिर पुजारियों की जांच पर भी घेरा, अयोध्या में फिर फंसी भगवा राजनीति?

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या एक बार फिर सबसे बड़े सियासी रणक्षेत्र के तौर पर उभरती दिख रही है। राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी को ऐसे मोर्चे पर घेरा है, जिसे भाजपा अपनी सबसे बड़ी वैचारिक ताकत मानती रही है। दिलचस्प बात यह है कि अखिलेश ने सिर्फ चढ़ावे की कथित गड़बड़ी का सवाल नहीं उठाया, बल्कि एसआईटी जांच के बाद पुजारियों की जांच को भी “सनातन का अपमान” बताकर दोनों तरफ से सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की है। 7 जून को अखिलेश यादव ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की रकम गायब होने की खबर दुनिया भर के राम भक्तों के लिए बेहद संवेदनशील है।

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इसी दिन देर रात उन्होंने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधिकारियों के बयानों पर तंज कसते हुए कहा कि उनके चेहरे और हावभाव में हताशा और निराशा साफ दिखाई दे रही है। इसके बाद 9 जून को अखिलेश यादव ने 11 सवालों की लंबी सूची जारी की और सीधे डबल इंजन सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की। उन्होंने पूछा कि क्या डबल इंजन सरकार सिर्फ डबल ईंधन खर्च करने के लिए है या उसकी कोई जिम्मेदारी भी है? उसी दिन देर रात उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर मौन क्यों है और क्या बड़े लोग जांच की आंच से डर रहे हैं? 13 जून को एसआईटी गठन के बाद भी सपा प्रमुख पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस दोषियों का पता लगाने में अक्षम है तो वह मदद करने को तैयार हैं। इसके अगले दिन आगरा में एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश ने कहा कि अगर प्रभु श्रीराम के चढ़ावे को लेकर कोई गड़बड़ी हुई है तो कैमरे बंद करके आपस में बात कर पैसा वापस कर दिया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों द्वारा पुजारियों की जांच कराया जाना सनातन धर्म का अपमान है। दरअसल, अयोध्या बीजेपी के लिए सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक और वैचारिक पहचान का केंद्र है।

पार्टी लगातार यह कहती रही है कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा और सपा के अवधेश प्रसाद ने भाजपा के लल्लू सिंह को पराजित कर दिया। हालांकि बाद में 2025 के मिल्कीपुर उपचुनाव में बीजेपी ने वापसी करते हुए चंद्रभानु पासवान को जीत दिलाकर राहत की सांस ली थी। अखिलेश यादव आज भी मिल्कीपुर उपचुनाव में धांधली के आरोप लगाते रहे हैं और अब राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर लगातार सरकार को घेर रहे हैं। उधर बीजेपी नेताओं का कहना है कि मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है और रिपोर्ट आने के बाद सारी तस्वीर साफ हो जाएगी। बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि एसआईटी की जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने “चोरी” शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जो भी विवाद है, उसकी पारदर्शी तरीके से जांच की जा रही है और एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। कुल मिलाकर, राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने अयोध्या की राजनीति को फिर गर्म कर दिया है। अखिलेश यादव इस मुद्दे के जरिए बीजेपी की हिंदुत्व की राजनीति को उसी मैदान में चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं, जहां भाजपा खुद को सबसे मजबूत मानती है। अब निगाहें एसआईटी रिपोर्ट पर हैं, क्योंकि उसी से तय होगा कि यह विवाद सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बनकर रह जाता है या फिर 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा बदलने वाला बड़ा मुद्दा साबित होता है