यूपी की सियासत में नया तूफान: सपा-कांग्रेस गठबंधन पर इमरान मसूद का बड़ा बयान
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की तस्वीर को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के हालिया बयान ने विपक्षी खेमे में नई बहस छेड़ दी है, सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद ने साफ कहा कि कांग्रेस किसी से “सीटों की भीख” मांगने नहीं आई है, अगर गठबंधन होगा तो वह बराबरी और सम्मान के आधार पर होगा, वरना पार्टी अपने दम पर 403 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कांग्रेस का दावा: 403 सीटों पर पूरी तैयारी
इमरान मसूद ने दावा किया कि कांग्रेस पूरे उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत कर रही है।
उनके मुताबिक पार्टी ने करीब 70% बूथ स्तर तक तैयारी पूरी कर ली है और हर सीट पर मजबूत रणनीति बनाई जा रही है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी सूरत में कमजोर स्थिति में बातचीत नहीं करेगी, बल्कि बराबरी के आधार पर ही गठबंधन संभव है।
सपा पर सीधा सवाल, मिला तीखा जवाब
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जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस समाजवादी पार्टी की दी हुई सीटों पर चुनाव लड़ेगी, तो इमरान मसूद ने तीखा जवाब दिया “देगी क्या मतलब? क्या हम किसी से भीख मांग रहे हैं?” उन्होंने आगे कहा कि गठबंधन में सीटें “दी” नहीं जातीं, बल्कि दोनों पार्टियां आपसी सहमति से फैसला करती हैं।
गठबंधन या अकेला चुनाव?
इमरान मसूद ने यह भी साफ किया कि समाजवादी पार्टी कोई ऐसी पार्टी नहीं है जो कांग्रेस को सीटें बांटे, अगर गठबंधन होता है तो वरिष्ठ नेता मिलकर सम्मानजनक समझौता करेंगे, और अगर बात नहीं बनी तो कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।
बंगाल का दिया उदाहरण
उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर पहले ही सही गठबंधन हो जाता, तो वहां राजनीतिक तस्वीर अलग हो सकती थी, यह बयान यूपी की राजनीति में गठबंधन रणनीति पर नई बहस को जन्म दे रहा है, इमरान मसूद के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर नई अटकलें तेज हो गई हैं, अब सवाल यह है कि क्या 2027 से पहले दोनों दल साथ आएंगे? या फिर अलग-अलग मैदान में उतरकर चुनावी मुकाबला और दिलचस्प बनाएंगे?
यूपी की राजनीति में गठबंधन की गूंज एक बार फिर तेज हो गई है, कांग्रेस जहां बराबरी के आधार पर बात करने की बात कर रही है, वहीं सपा के साथ रिश्तों की दिशा अभी पूरी तरह साफ नहीं है, 2027 का चुनाव अब सिर्फ वोट की नहीं, बल्कि रणनीति और गठबंधन की भी बड़ी लड़ाई बनने जा रहा है।






