बरेली से बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश में मदरसों की जांच एक बार फिर शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने इस बार जांच की जिम्मेदारी एटीएस को सौंपी है। इस फैसले का आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने स्वागत किया है। वहीं, उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त किए जाने के फैसले का उन्होंने कड़ा विरोध करते हुए इसे संविधान के खिलाफ बताया है।
बरेली में मीडिया से बातचीत करते हुए आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मदरसों की कई बार जांच हो चुकी है और अब पांचवीं बार एटीएस को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज और मदरसा प्रबंधन जांच का पूरा स्वागत करता है। एटीएस के अधिकारी जब भी मदरसों में आएंगे, उन्हें सभी आवश्यक दस्तावेज, रजिस्टर और कानूनी अभिलेख उपलब्ध कराए जाएंगे। मदरसों का पूरा रिकॉर्ड पारदर्शी है और जांच एजेंसियों के लिए हमेशा खुला है।
मौलाना ने कहा कि एटीएस जांच के खिलाफ कुछ मदरसा संगठनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने जांच पर रोक लगाने से इनकार करते हुए जांच का रास्ता साफ कर दिया। ऐसे में सभी मदरसों को जांच में पूरा सहयोग करना चाहिए।
उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड समाप्त किए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 25 की भावना के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि संविधान अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका संचालन करने का अधिकार देता है। उनका आरोप है कि उत्तराखंड सरकार के इस फैसले से अल्पसंख्यकों की शिक्षा प्रभावित होगी और राज्य में करीब 250 मदरसों पर ताले लग गए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि देश में विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के संरक्षण के लिए समय-समय पर कानून बनाए गए तथा सरकारों ने हिंदी, उर्दू, सिंधी और अरबी-फारसी जैसी भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए अकादमियों और मदरसा बोर्डों की स्थापना की। ऐसे में उर्दू और अरबी भाषा से जुड़े संस्थानों को कमजोर करने वाले कदम चिंता का विषय हैं।






