राम मंदिर में कथित चोरी… पीएम मोदी की चुप्पी… और अब बीजेपी के एक ब्राह्मण सांसद के बयान ने सियासी भूचाल मचा दिया जी हां… अयोध्या इस वक्त सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति का सबसे बड़ा पॉवर सेंटर बन चुका है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आग बबूला है और साफ कह रहे हैं कि राम मंदिर में कथित चोरी के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा , वहीं दूसरी तरफ विरोधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठा रहा है। लेकिन अब बीजेपी के ही राज्यसभा सांसद मनन मिश्रा के एक बयान ने इस पूरे विवाद को और अधिक गर्मा दिया है।

दरअसल, जब मनन मिश्रा से पूछा गया कि विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि राम मंदिर निर्माण से लेकर प्राण प्रतिष्ठा और ट्रस्ट के गठन तक हर महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख भूमिका रही, तो फिर राम मंदिर में कथित चोरी के मामले पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई? इस सवाल के जवाब में मनन मिश्रा ने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, उनके पास राष्ट्र और विदेश नीति से जुड़े कई बड़े काम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में हुई चोरी जैसी “छोटी घटना” पर प्रधानमंत्री के बयान की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार इस मामले की जांच पुलिस, एसआईटी और अन्य एजेंसियां कर रही हैं और उन्हें अपना काम करने देना चाहिए। यहीं से सियासत और तेज हो गई। विपक्ष ने इस बयान को मुद्दा बना लिया और सवाल उठाने शुरू कर दिए कि अगर यह वास्तव में इतनी छोटी घटना है, तो फिर अयोध्या में आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों की लगातार बैठकों का क्या मतलब है? आखिर ट्रस्ट की व्यवस्था, जिम्मेदारियों और सुरक्षा को लेकर इतनी गंभीर चर्चाएं क्यों हो रही हैं? विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे को हल्के में दिखाने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी इन आरोपों से सहमत नहीं है।

राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि राम मंदिर बीजेपी के लिए केवल एक धार्मिक विषय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और पार्टी के सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दों में से एक रहा है। ऐसे में इस तरह के बयान को लेकर अलग-अलग तरह की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि चोरी से जुड़े मामले की जांच अभी जारी है और इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान पर बीजेपी कोई आधिकारिक सफाई देती है या नहीं, और क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या पार्टी नेतृत्व इस पूरे विवाद पर आगे कोई प्रतिक्रिया देता है। फिलहाल अयोध्या का यह मामला आस्था, सुरक्षा और सियासत—तीनों के केंद्र में बना हुआ है।






