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चार दल बदले, चारों से जीते चुनाव कैसे बने राजनीति के ‘मौसम वैज्ञानिक’ शिवेंद्र सिंह?

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महराजगंज। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ नेताओं की पहचान किसी एक पार्टी से नहीं, बल्कि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और बदलते सियासी दौर में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने की क्षमता से होती है। महराजगंज के पूर्व मंत्री शिवेंद्र सिंह उर्फ शिवबाबू ऐसा ही एक नाम हैं। उन्हें राजनीतिक गलियारों में “मौसम वैज्ञानिक” कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने समय-समय पर बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच कई दलों का साथ लिया और चार अलग-अलग राजनीतिक दलों के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने का दुर्लभ रिकॉर्ड बनाया।

शिवेंद्र सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की। वर्ष 1985 में वे पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी का दामन थामा। खास बात यह रही कि चारों दलों के टिकट पर उन्होंने विधानसभा पहुंचकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का परिचय दिया।

करीब चार दशक तक पूर्वांचल की राजनीति में सक्रिय रहे शिवेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। क्षेत्र में उनकी व्यक्तिगत पकड़, जनसंपर्क और संगठन क्षमता उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाती रही। कई चुनावों में उन्होंने जीत हासिल की, जबकि कुछ चुनावों में हार का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी राजनीतिक मौजूदगी हमेशा चर्चा का विषय बनी रही।

राजनीतिक विश्लेषकों ने उन्हें “मौसम वैज्ञानिक” की उपाधि दी। इसकी वजह यह रही कि वे प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अपने फैसले लेने के लिए जाने जाते थे। उनके दल बदलने को लेकर राजनीतिक हलकों में हमेशा चर्चा होती रही, लेकिन हर दौर में उन्होंने अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी।

साल 2017 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक सफर का अहम पड़ाव साबित हुआ। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रेमसागर पटेल ने उन्हें बड़े अंतर से पराजित किया। इसके बाद शिवेंद्र सिंह ने समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में वापसी की। उस समय यह कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा उन्हें दोबारा चुनाव मैदान में उतार सकती है, लेकिन पार्टी ने तत्कालीन विधायक प्रेमसागर पटेल पर ही भरोसा जताया।

आज भले ही शिवेंद्र सिंह पहले जैसी सक्रिय चुनावी भूमिका में नजर नहीं आते हों, लेकिन महराजगंज और पूर्वांचल की राजनीति में उनका नाम अब भी सम्मान और प्रभाव के साथ लिया जाता है। चार अलग-अलग दलों से चुनाव जीतने का उनका रिकॉर्ड उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे चर्चित नेताओं में शामिल करता है।

शिवेंद्र सिंह का राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि राजनीति में केवल पार्टी ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जनाधार, राजनीतिक अनुभव और स्थानीय प्रभाव भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि पूर्वांचल की राजनीति का जिक्र होते ही शिवबाबू का नाम आज भी प्रमुखता से लिया जाता है।

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