Five-Time SP MLA Alambadi Azmi Passes Away.
पांच बार विधायक रहे आलमबदी आजमी का निधन
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे आलमबदी आजमी का निधन हो गया। उनके निधन से समाजवादी पार्टी और पूर्वांचल की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है। सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले आलमबदी आजमी ने दशकों तक जनता के बीच रहकर अपनी अलग पहचान बनाई।
1996 में शुरू हुआ था विधानसभा का सफर
आलमबदी आजमी ने वर्ष 1996 में पहली बार निजामाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने 2002, 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी जीत दर्ज की। इस तरह वह कुल पांच बार विधायक चुने गए। केवल 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी अंगद यादव से हार का सामना करना पड़ा था।
2022 में बड़े अंतर से दर्ज की थी जीत
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आलमबदी आजमी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करते हुए भाजपा प्रत्याशी मनोज यादव को 34 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया और लगातार पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे।
सादगी थी उनकी सबसे बड़ी पहचान
आलमबदी आजमी की पहचान केवल एक वरिष्ठ राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए भी थी। पूर्वांचल की राजनीति में जहां बाहुबल और धनबल की चर्चा होती रही, वहीं उन्होंने बेहद साधारण जीवन जीते हुए जनता का विश्वास हासिल किया। साधारण कुर्ता-पायजामा, मामूली चप्पल, कान में सुनने की छोटी मशीन और हाथ में सामान्य मोबाइल फोन उनकी सादगी की पहचान थे।
जनता से जुड़े रहे, नहीं बदला जीवन
लंबे राजनीतिक जीवन और लगातार चुनावी सफलताओं के बावजूद उनके रहन-सहन में कभी बदलाव नहीं आया। यही सरल स्वभाव और सहज व्यवहार उन्हें आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाता रहा। निजामाबाद क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और लगातार पांच बार विधायक चुना जाना उनकी जनस्वीकार्यता का प्रमाण माना जाता है।
पूर्वांचल की राजनीति को अपूरणीय क्षति
आलमबदी आजमी का राजनीतिक जीवन केवल चुनावी जीत-हार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह सादगी, संघर्ष और जनसेवा की राजनीति की मिसाल बनकर उभरे। उनके निधन से समाजवादी पार्टी के साथ-साथ आजमगढ़ और पूरे पूर्वांचल की राजनीति को एक अपूरणीय क्षति हुई है।
