चंडीगढ़। पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम अब सिर्फ नशा तस्करों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रही है। पंजाब पुलिस ने अभियान को जन आंदोलन का रूप देने के लिए गांवों, शहरों, वार्डों और शिक्षण संस्थानों में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू किया है।
39 हजार 236 पुलिस-जन बैठकें
पंजाब पुलिस के अनुसार, 1 मार्च 2025 से 5 अगस्त 2026 तक राज्यभर में कुल 39 हजार 236 पुलिस-जन बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों का उद्देश्य आम लोगों को नशे के खिलाफ अभियान से जोड़ना और नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करना है।
सबसे ज्यादा 25 हजार 328 बैठकें विलेज डिफेंस कमेटियों और वार्ड डिफेंस कमेटियों के सदस्यों के साथ आयोजित की गईं। लोगों को अपने क्षेत्र में नशा तस्करी की सूचना तत्काल पुलिस को देने, युवाओं को नशे से दूर रखने और नशा पीड़ितों को उपचार एवं नशा मुक्ति केंद्रों तक पहुंचाने के लिए जागरूक किया गया।
1.25 लाख स्वयंसेवक अभियान से जुड़े
पंजाब में इस समय करीब 13 हजार विलेज डिफेंस कमेटियां सक्रिय हैं। इन कमेटियों से लगभग 1 लाख 25 हजार स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं। इनमें गांवों के बुजुर्ग, सेवानिवृत्त सैनिक, पूर्व पुलिसकर्मी, शिक्षक और समाज के अन्य सम्मानित नागरिक शामिल हैं।
युवाओं पर विशेष फोकस
नशे से युवाओं को दूर रखने के लिए पंजाब पुलिस ने स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में भी व्यापक अभियान चलाया। इस दौरान 10 हजार 605 जागरूकता बैठकें आयोजित की गईं। विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभाव, स्वस्थ जीवनशैली और गलत संगत से बचने के बारे में जानकारी दी गई।
इसके अलावा युवाओं के साथ 3 हजार 303 संपर्क बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने युवाओं से सीधे संवाद किया और नशा मुक्ति, उपचार एवं पुनर्वास से जुड़ी जानकारी साझा की।
समाज की भागीदारी जरूरी: DGP गौरव यादव
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून लागू करने या तस्करों की गिरफ्तारी से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज के हर वर्ग की बराबर भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस संगठित नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है, लेकिन स्थायी सफलता तभी मिलेगी जब आम लोग भी जागरूक होकर इस अभियान का हिस्सा बनेंगे।
गांव से हर वार्ड तक पहुंच
पंजाब पुलिस अब नशा विरोधी अभियान को गांवों से लेकर शहरी वार्डों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचा रही है। पुलिस का मानना है कि कार्रवाई के साथ जनजागरूकता और सामाजिक भागीदारी ही नशे के खिलाफ अभियान को लंबे समय तक प्रभावी बना सकती है।






