महिला सुरक्षा, बेटियों की शिक्षा और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कई पहल; ‘परिवार संतृप्तिकरण अभियान’ के जरिए स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने पर फोकस
उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को लेकर सरकार की नीतियों का दायरा लगातार बढ़ा है, महिला सुरक्षा के लिए पुलिसिंग व्यवस्था में बदलाव के साथ-साथ बेटियों की शिक्षा, जरूरतमंद महिलाओं की आर्थिक मदद और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं और अभियानों पर जोर दिया जा रहा है हालांकि, इन पहलों के बीच अहम सवाल यह है कि इनका जमीन पर महिलाओं की जिंदगी पर कितना असर पड़ा है और क्या सुरक्षा के साथ शिक्षा तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी बदलाव दिखाई दे रहा है।
महिला सुरक्षा के लिए कई पहल
वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर कई व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया है, थानों में महिला हेल्प डेस्क, महिला हेल्पलाइन 1090, एंटी रोमियो स्क्वॉड, महिला बीट पुलिसिंग और पिंक पेट्रोलिंग जैसी पहलें इसी दिशा में उठाए गए कदमों में शामिल हैं, सरकार का दावा है कि पुलिस विभाग में महिलाओं की भागीदारी भी पहले की तुलना में बढ़ी है, इसका उद्देश्य महिलाओं की शिकायतों पर त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई के साथ सुरक्षा व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका को मजबूत करना है।
शिक्षा और आर्थिक मदद पर भी फोकस
महिला सशक्तिकरण का दूसरा अहम पहलू शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा है, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के जरिए बालिकाओं की शिक्षा और विकास के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है वहीं, निराश्रित महिला पेंशन योजना के जरिए जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को बचत, ऋण, प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ‘लखपति दीदी’ जैसे अभियानों का उद्देश्य भी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
अब घर-घर पहुंच रहा ‘परिवार संतृप्तिकरण अभियान’
सरकार की कोशिश अब उन महिलाओं तक पहुंचने की है, जो अभी तक स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण आजीविका मिशन से नहीं जुड़ी हैं, इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में ‘परिवार संतृप्तिकरण अभियान’ चलाया जा रहा है, 5 अगस्त से शुरू हुआ यह अभियान 20 अगस्त तक चलने के लिए निर्धारित है, अभियान के दौरान विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर नोडल अधिकारी घर-घर जाकर ऐसे पात्र परिवारों की पहचान कर रहे हैं, जहां महिलाएं अभी तक स्वयं सहायता समूह से नहीं जुड़ी हैं, पहचान के बाद पात्र महिलाओं को समूहों से जोड़ने की प्रक्रिया होगी, ताकि वे बचत, ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका के अवसरों का लाभ उठा सकें।

बैंकिंग से जोड़कर रोजगार तक पहुंचाने की कोशिश
अभियान में बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने पर भी विशेष जोर है। सरकार ने पात्र स्वयं सहायता समूहों के बैंक खाते खुलवाने के निर्देश दिए हैं, बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने के बाद समूहों के लिए वित्तीय सहायता और बैंक ऋण तक पहुंच आसान हो सकती है, इसके जरिए महिलाएं छोटे कारोबार और स्वरोजगार की गतिविधियां शुरू कर सकती हैं, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, कृषि आधारित गतिविधियां और घरेलू उद्योग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
‘लाभार्थी’ से ‘उद्यमी’ बनने की दिशा
स्वयं सहायता समूहों का उद्देश्य अब सिर्फ छोटी-छोटी बचत तक सीमित नहीं माना जा रहा है, समूहों के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सेवाओं, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, एक महिला समूह से जुड़ती है, बचत करती है, जरूरत के अनुसार ऋण प्राप्त करती है, प्रशिक्षण हासिल करती है और फिर अपना छोटा कारोबार शुरू कर सकती है, इस पूरी प्रक्रिया को एक कड़ी के रूप में देखा जा सकता है बचत से बैंकिंग, बैंकिंग से ऋण, ऋण से कारोबार, कारोबार से आत्मनिर्भरता।
आगे की असली चुनौती
उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की कोशिश अब सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है। सुरक्षित माहौल के साथ शिक्षा, शिक्षा के साथ आर्थिक अवसर और आर्थिक अवसर के साथ आत्मनिर्भरता को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ‘परिवार संतृप्तिकरण अभियान’ के जरिए सरकार की कोशिश है कि स्वयं सहायता समूहों और आजीविका के अवसरों से अब तक बाहर रही पात्र महिलाओं तक पहुंच बनाई जाए, अब महत्वपूर्ण यह होगा कि अभियान के बाद कितनी महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ती हैं और कितनी महिलाएं आगे चलकर आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाती हैं।
क्योंकि जब ग्रामीण महिला की आय बढ़ती है, तो उसका असर सिर्फ उसके परिवार तक सीमित नहीं रहता, आर्थिक रूप से मजबूत महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग, रोजगार और छोटे कारोबार के विस्तार में भी योगदान दे सकती हैं, सुरक्षा से सम्मान, सम्मान से अवसर और अवसर से आत्मनिर्भरता यही महिला सशक्तिकरण की इस पूरी कवायद की सबसे बड़ी तस्वीर है।






