मुंबई: ‘बिग बॉस 13’ से देशभर में पहचान बनाने वाली पंजाबी अभिनेत्री और सिंगर हिमांशी खुराना इन दिनों अपनी निजी जिंदगी से जुड़े एक भावुक खुलासे को लेकर चर्चा में हैं। एक पॉडकास्ट बातचीत में हिमांशी ने अपने बचपन के उन मुश्किल अनुभवों को साझा किया, जिन्हें याद करते हुए वह भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने माता-पिता के रिश्ते में कथित घरेलू हिंसा, आर्थिक परेशानियों और बचपन में परिवार को संभालने की मजबूरी के बारे में बात की।
हिमांशी ने पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट में बताया कि बचपन में उन्होंने घर के भीतर हिंसा का ऐसा माहौल देखा, जिसने उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर डाला। उनके मुताबिक, उनके पिता शराब के नशे में उनकी मां के साथ मारपीट करते थे। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती थी कि उनकी मां बेहोश हो जाती थीं।
‘मम्मी को बहुत मारते थे पापा’
हिमांशी ने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि घर में अक्सर तनाव और हिंसा का माहौल रहता था। उन्होंने कहा कि कई बार उनके पिता शराब के नशे में घर आते थे और उनकी मां के साथ मारपीट करते थे।एक्ट्रेस के मुताबिक, हिंसा की वजह से उनकी मां को गंभीर चोटें भी आईं और एक घटना में उनका हाथ तक टूट गया था। हिमांशी ने बताया कि उस उम्र में उनके लिए यह सब देखना बेहद मुश्किल था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें समय से पहले जिम्मेदार बना दिया।
कई बार खाना भी नहीं मिलता था
हिमांशी ने अपने बचपन की आर्थिक परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि घर में कई बार राशन नहीं होता था या परिस्थितियों के कारण खाना नहीं बन पाता था। ऐसे में वह और उनका छोटा भाई कई बार भूखे रह जाते थे।उन्होंने बताया कि स्कूल जाते समय कई बार उनके पास नाश्ता तक नहीं होता था। अगर कुछ पैसे मिल जाते तो वह कैंटीन से खाना खा लेते थे। घर लौटने पर कई बार खाने की व्यवस्था नहीं होती थी।
छोटे भाई को गोद में लेकर बाहर भागती थीं
हिमांशी ने बताया कि जब घर में मारपीट शुरू होती थी, तो वह अपने छोटे भाई को गोद में उठाकर घर से बाहर निकल जाती थीं। इसके बाद आसपास मिलने वाले लोगों से मदद मांगकर उन्हें घर लेकर आती थीं।उन्होंने बताया कि उस समय वह करीब छठी या सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं। इतनी कम उम्र में मां को हिंसा से बचाने और छोटे भाई की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके लिए बेहद दर्दनाक अनुभव था।
‘भगवान तू ही मेरा बाप है’
हिमांशी ने अपने बचपन की एक बेहद भावुक बात भी साझा की। उन्होंने बताया कि जब उन्हें लगता था कि वह अपनी परेशानियां या जरूरतें अपने पिता से नहीं कह सकतीं, तब वह भगवान से मन की बात करती थीं।उनके मुताबिक, उन्होंने बचपन में भगवान से कहा था कि ‘तू ही मेरा बाप है।’ हिमांशी ने बताया कि उस समय उनके मन में यह भावना इसलिए आई क्योंकि वह अपने पिता से कुछ मांगने या उनसे भावनात्मक सहारा लेने की स्थिति में खुद को असहाय महसूस करती थीं।
बचपन के अनुभवों ने छोड़ी गहरी छाप
हिमांशी की इस बातचीत ने उनके प्रशंसकों को उनके जीवन के उस पक्ष से रूबरू कराया, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे। सार्वजनिक जीवन में ग्लैमर और सफलता के लिए पहचानी जाने वाली हिमांशी ने इस बातचीत में अपने बचपन की मुश्किल परिस्थितियों और परिवार के भीतर देखी हिंसा के अनुभवों को साझा किया।उनकी कहानी ने एक बार फिर घरेलू हिंसा और बच्चों पर उसके मानसिक प्रभाव जैसे गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान खींचा है। हिमांशी के मुताबिक, बचपन में देखे गए इन अनुभवों ने उनकी जिंदगी और सोच पर गहरी छाप छोड़ी।