गोपालगंज: बिहार की राजनीति से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। गोपालगंज के कुचायकोट से JDU विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय की मुश्किलें एक पुराने आपराधिक मामले में बढ़ती नजर आ रही हैं। करीब सात साल पुराने जान से मारने की नीयत से फायरिंग के मामले में विशेष MP-MLA अदालत ने विधायक समेत तीन आरोपितों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।
अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब यह मामला सुनवाई के अगले चरण में पहुंच गया है। हालांकि, कानूनी तौर पर आरोप तय होना किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में अंतिम फैसला अदालत साक्ष्यों और पूरी न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर करेगी।
पप्पू पांडेय समेत तीन के खिलाफ आरोप तय
इस मामले में JDU विधायक पप्पू पांडेय के अलावा उनके बड़े भाई सतीश पांडेय और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष तथा उनके भतीजे मुकेश पांडेय के खिलाफ भी आरोप तय किए गए हैं।मामला गोपालगंज जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र के नयागांव तुलसिया सिंगहा टोला से जुड़ा है। वर्ष 2019 में फूलमती कुंवर की ओर से इस मामले में FIR दर्ज कराई गई थी।शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनके बेटे अभिमन्यु तिवारी को निशाना बनाकर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।
पुलिस जांच के बाद दाखिल हुई थी चार्जशीट
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों, आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी।अब विशेष MP-MLA अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी और अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों तथा अन्य साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश किया जाएगा।आने वाले चरण में गवाहों के बयान और उपलब्ध दस्तावेज मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सात साल पुराने मामले ने फिर बढ़ाई सियासी हलचल
करीब सात साल पुराने इस मामले में अदालत की कार्रवाई ने बिहार की राजनीति में भी चर्चा तेज कर दी है। पप्पू पांडेय लंबे समय से गोपालगंज की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।ऐसे में पुराने आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने से राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। खासतौर पर चुनावी राजनीति में नेताओं के खिलाफ लंबित मुकदमों को लेकर अक्सर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर निशाना साधते रहे हैं।हालांकि, इस मामले में फिलहाल अदालत ने सिर्फ आरोप तय किए हैं। दोष सिद्ध होने या न होने का फैसला आगे की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर होगा।
अब आगे क्या होगा?
आरोप तय होने के बाद अब मुकदमे की नियमित सुनवाई आगे बढ़ेगी। अभियोजन पक्ष अदालत में अपने गवाह और साक्ष्य पेश करेगा। इसके बाद बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।यानी फिलहाल इस मामले में कानूनी प्रक्रिया लंबी हो सकती है। अब नजर अदालत की अगली सुनवाई और पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर रहेगी।सियासी तौर पर भी बड़ा सवाल यही है कि क्या सात साल पुराने इस मामले की आगे बढ़ती कानूनी प्रक्रिया JDU विधायक पप्पू पांडेय के राजनीतिक भविष्य पर कोई असर डालेगी? इसका जवाब आने वाले समय में अदालत की कार्रवाई और मामले के परिणाम से ही स्पष्ट होगा।