बिहार के सभी जिलों में बनेगा दंगा निरोधी दस्ता, पुलिस मुख्यालय ने जारी की पूरी कार्ययोजना
बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लिया है, राज्य के सभी जिलों में जिला दंगा निरोधी दस्ता गठित किया जाएगा, इसका उद्देश्य दंगा, हिंसक प्रदर्शन, सामुदायिक तनाव, सड़क जाम और सरकारी संपत्ति पर हमले जैसी आकस्मिक परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटना और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाना है, पुलिस मुख्यालय की ओर से बुधवार, 19 अगस्त को इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना जारी की गई।
जिले और अनुमंडल स्तर पर बनेगी इकाई
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, प्रत्येक जिले और अनुमंडल स्तर पर दंगा नियंत्रण इकाई गठित की जाएगी, इन दस्तों में प्रभारी पदाधिकारी के साथ प्रशिक्षित पुलिस पदाधिकारी और जवान शामिल होंगे, बल में प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी, जरूरत के अनुसार चिकित्सा एवं एंबुलेंस सहायता दल, वीडियोग्राफी एवं दस्तावेजीकरण के लिए नामित कर्मी, संचार एवं रिजर्व बल तथा लाठी दस्ते के जवान भी शामिल होंगे।
एक कंपनी में होंगी तीन प्लाटून
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योजना के तहत प्रत्येक कंपनी में तीन प्लाटून होंगी। प्रत्येक प्लाटून में अश्रु गैस दस्ता, लाठी दस्ता, सशस्त्र बल, चालक और वायरलेस ऑपरेटर समेत कुल 47 कर्मी होंगे, हर प्लाटून के साथ दो वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस व्यवस्था के तहत पूरे राज्य में कुल 49 कंपनियों के दंगा निरोधी दस्ते गठित किए जाएंगे। इनके लिए कुल 294 वाहनों की व्यवस्था करने की योजना है।
तीन श्रेणियों में होगी बल की तैनाती
पुलिस मुख्यालय ने जिलों को तीन श्रेणियों में बांटकर दंगा निरोधी बल की तैनाती की योजना बनाई है।
श्रेणी ‘ए’
पटना जिले को तीन कंपनियां और 18 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।
वहीं गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, बेतिया, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, भागलपुर और बेगूसराय को दो-दो कंपनियां और 12-12 वाहन दिए जाएंगे।
श्रेणी ‘बी’
नालंदा, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, वैशाली, सीतामढ़ी, सिवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, बांका, मुंगेर, जमुई और खगड़िया में एक-एक कंपनी तैनात की जाएगी। इन जिलों को छह-छह वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।
श्रेणी ‘सी’
अरवल, शिवहर, बगहा, लखीसराय, शेखपुरा और नवगछिया में एक-एक प्लाटून तैनात होगी। इन स्थानों पर दो-दो वाहन उपलब्ध कराने की योजना है।
20 मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना होगा दस्ता
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, किसी जिले में दंगा या हिंसक स्थिति की सूचना मिलते ही जिला नियंत्रण कक्ष तत्काल सूचना प्रसारित करेगा। इसके बाद दंगा निरोधी दस्ता 20 मिनट के भीतर निर्धारित घटनास्थल के लिए रवाना होगा, मौके पर पहुंचने के बाद टीम वरीय पुलिस पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करेगी और स्थिति का लगातार आकलन करेगी। परिस्थितियों के अनुसार नियमानुकूल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जवानों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
दंगा निरोधी दस्ते के जवानों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक जिले के पुलिस केंद्र में एक महीने का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा, प्रशिक्षकों के रूप में पुलिस निरीक्षक, सार्जेंट मेजर और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों का चयन किया जाएगा, चयनित प्रशिक्षकों को रैपिड एक्शन फोर्स अकादमी फॉर पब्लिक ऑर्डर, मेरठ में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, इसके बाद ये प्रशिक्षक अपने-अपने जिलों में दंगा निरोधी बल के चयनित पदाधिकारियों और जवानों को प्रशिक्षण देंगे। इसके अलावा प्रत्येक तीन महीने में हर प्लाटून के लिए एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स भी आयोजित किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारी करेंगे निगरानी
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि दंगा निरोधी बल की तैनाती, प्रशिक्षण, उपकरण और आवास सहित आवश्यक व्यवस्थाओं की निगरानी वरीय पुलिस अधिकारी करेंगे। क्षेत्रीय स्तर पर पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस उपमहानिरीक्षक भी इसकी मॉनिटरिंग करेंगे, इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसी भी आकस्मिक कानून-व्यवस्था की स्थिति में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना और हिंसक घटनाओं पर जल्द नियंत्रण स्थापित करना है।
मुख्य बिंदु
-सभी जिलों में दंगा निरोधी दस्ता गठित होगा।
-राज्य में कुल 49 कंपनियां गठित करने की योजना।
-कुल 294 वाहनों की व्यवस्था की जाएगी।
-एक प्लाटून में 47 कर्मी होंगे।
-सूचना मिलने के 20 मिनट के भीतर दस्ता रवाना होगा।
-जवानों को एक महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-हर तीन महीने में रिफ्रेशर ट्रेनिंग होगी।