लखनऊ, 19 अगस्त। उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर परिवहन विभाग प्रदेशभर में स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच के साथ चालकों के चरित्र सत्यापन और मेडिकल परीक्षण पर विशेष जोर दे रहा है।
परिवहन विभाग के 13 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 19,680 स्कूल हैं। इनमें 74,337 वाहन स्कूलों के नाम से पंजीकृत हैं, जबकि 8,022 वाहन स्कूलों से अनुबंधित हैं। इस तरह प्रदेश में कुल 82,259 स्कूली वाहनों की निगरानी की जा रही है।
मिशन सेफ फ्यूचर समेत विभिन्न अभियानों के तहत प्रदेशभर में स्कूली वाहनों की जांच की गई। इस दौरान 6,066 वाहन अनफिट पाए गए। इन वाहनों के खिलाफ नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई। वहीं नियमों का उल्लंघन करने वाले 1,072 वाहनों का चालान किया गया, जबकि गंभीर अनियमितताओं पर 356 वाहनों को सीज किया गया।
बच्चों की सुरक्षा में वाहन चालकों की भूमिका को देखते हुए परिवहन विभाग ने उनके चरित्र सत्यापन पर भी विशेष ध्यान दिया है। अब तक प्रदेश में 27,066 स्कूली वाहन चालकों का चरित्र सत्यापन कराया जा चुका है। विभाग की ओर से स्कूल प्रबंधन को चालकों की आवश्यक जांच पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं।
परिवहन विभाग ने यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई, यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड समेत सभी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों को बस और वैन चालकों का पुलिस चरित्र सत्यापन और मेडिकल परीक्षण अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने इस संबंध में स्कूलों को पत्र जारी कर नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है।
अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर के मुताबिक, मिशन सेफ फ्यूचर और अन्य अभियानों का उद्देश्य स्कूली वाहनों को फिट रखना, चालकों का सत्यापन कराना और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के बच्चों को सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा उपलब्ध हो।