लखनऊ: राजधानी लखनऊ के काकोरी इलाके से सामने आया शीतला मंदिर का एक विवाद अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। मंदिर के जीर्णोद्धार के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान बीजेपी विधायक जयदेवी कौशल ने आरोप लगाया कि पूजा-अर्चना के दौरान उनके साथ उचित सम्मान नहीं किया गया और इसकी वजह उनकी जाति थी। विधायक के आरोप के बाद मामला सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है।
विधायक जयदेवी कौशल का दावा है कि वह पासी समाज से आती हैं और इसी वजह से उनके साथ धार्मिक कार्यक्रम में भेदभाव किया गया। उनका कहना है कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करीब एक करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कराने में उन्होंने प्रयास किया था। ऐसे में जिस परियोजना के लिए उन्होंने पहल की, उसके शिलान्यास कार्यक्रम में पूजा की प्रक्रिया में उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।
‘एक धूपबत्ती तक नहीं जलाने दी’
विधायक का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान उन्हें पूजा-अर्चना में विधिवत शामिल नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब मंदिर के विकास के लिए उन्होंने प्रयास किया, तो पूजा के दौरान उन्हें धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया।विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे एक धूपबत्ती तक नहीं जलवाई गई। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें अपमानित महसूस हुआ और उन्हें लगा कि उनके साथ जातिगत आधार पर भेदभाव किया गया।मामले के सामने आने के बाद विधायक के बेटे विकास किशोर ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर घटना को लेकर सवाल उठाए और इसे कथित तौर पर साजिश के तहत किया गया अपमान बताया।
विरोध में मंदिर पहुंचे आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता
विवाद बढ़ने के बाद आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता भी शीतला मंदिर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। इसके साथ ही मामला जातिगत सम्मान और धार्मिक स्थलों पर समान व्यवहार की बहस से जुड़ गया।हालांकि, मंदिर प्रबंधन ने विधायक के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। प्रबंधन का कहना है कि विधायक को पूजा से रोका नहीं गया था और न ही उनके साथ जाति के आधार पर कोई भेदभाव किया गया।
मंदिर प्रबंधन का दावा- ‘खुद पूजा से इनकार किया’
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, विधायक को पूजा में शामिल होने के लिए कहा गया था। प्रबंधन का दावा है कि उन्हें नारियल और फूल चढ़ाने के लिए भी कहा गया था, लेकिन उन्होंने खुद पूजा आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और पुजारी से पूजा करने को कहा।इस दावे के समर्थन में एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में पुजारी विधायक की ओर नारियल बढ़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि उपलब्ध वीडियो से स्पष्ट होता है कि विधायक को पूजा में शामिल होने से नहीं रोका गया।
अब सवाल- भेदभाव या प्रोटोकॉल का विवाद?
इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ बीजेपी विधायक का गंभीर आरोप है कि उन्हें जातिगत पहचान की वजह से पूजा में उचित सम्मान नहीं दिया गया। दूसरी तरफ मंदिर प्रबंधन का कहना है कि ऐसा कोई भेदभाव नहीं हुआ और विधायक ने खुद पूजा करने से मना किया था।ऐसे में अब विवाद का केंद्र सिर्फ यह नहीं रह गया है कि पूजा किसने की या नारियल किसने चढ़ाया। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में जातिगत भेदभाव का मामला था या फिर पूजा की प्रक्रिया और कार्यक्रम के प्रोटोकॉल को लेकर पैदा हुआ विवाद राजनीतिक रूप ले गया?फिलहाल दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। सामने आए वीडियो और कार्यक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों के आधार पर ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और साफ हो सकेगी।