लखनऊ, 19 अगस्त। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और सिंचाई विरासत को बड़ी वैश्विक पहचान मिली है। झांसी में बेतवा नदी पर बना करीब 140 साल पुराना पारीछा बांध अब वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर्स (WHIS) की सूची में शामिल हो गया है। इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (ICID) ने बांध को यह प्रतिष्ठित मान्यता दी है। पारीछा बांध को WHIS अवार्ड-26 से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार 14 अक्टूबर को फ्रांस के मार्सेई में आयोजित 26वीं ICID इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मीटिंग के दौरान प्रदान किया जाएगा।
पारीछा बांध बुंदेलखंड की सिंचाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। करीब 1,174 मीटर लंबे इस बांध की ऊंचाई नदी तल से लगभग 16.8 मीटर है। इसमें पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए 318 स्टील गेट लगाए गए हैं। बांध की जल भंडारण क्षमता भी बढ़ाई गई है। पहले यहां करीब 1,700 मिलियन क्यूबिक फीट पानी का भंडारण होता था, जिसे बढ़ाकर लगभग 2,400 मिलियन क्यूबिक फीट किया गया है। इससे बुंदेलखंड के कई क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
पारीछा बांध की सिंचाई परियोजना की नींव 19वीं सदी में रखी गई थी। वर्ष 1855 में कैप्टन स्ट्रेची ने बुंदेलखंड के लिए नहर प्रणाली विकसित करने का विचार रखा था। सर्वेक्षण के बाद 1881 में बांध का निर्माण शुरू हुआ और 1886 में यह चालू हो गया। करीब 140 साल बाद भी यह बांध क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बेतवा नहर प्रणाली के जरिए बुंदेलखंड के सूखे क्षेत्रों में खेती के लिए पानी पहुंचाया जाता है। पारीछा बांध केवल सिंचाई के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी बन चुका है। बारिश के मौसम में जब बांध के गेट खोले जाते हैं तो यहां का दृश्य लोगों को आकर्षित करता है। इसके अलावा बांध से पारीछा थर्मल पावर प्रोजेक्ट को भी पानी की आपूर्ति होती है, जिसकी बिजली उत्पादन क्षमता 920 मेगावाट बताई गई है।
पारीछा बांध को WHIS की वैश्विक मान्यता बुंदेलखंड की ऐतिहासिक जल संरचनाओं के संरक्षण और उनके महत्व को दुनिया के सामने रखने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। योगी सरकार जहां पुरानी जल संरचनाओं और सिंचाई विरासत को संरक्षित करने पर जोर दे रही है, वहीं आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूत करने का प्रयास कर रही है।