पटना/मुजफ्फरपुर: बिहार में युवाओं को सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद जल्द ही राज्यस्तरीय धार्मिक युवा सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी में है। सम्मेलन की तारीख जल्द घोषित किए जाने की बात कही गई है। पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन ने मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद इसकी जानकारी दी।उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपराओं तथा नैतिक मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। प्रस्तावित सम्मेलन के जरिए युवाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जाएगा।
युवाओं को सनातन परंपरा से जोड़ने की तैयारी
धार्मिक युवा सम्मेलन को लेकर पर्षद की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की जानकारी देने के साथ समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को लेकर जागरूक करना बताया गया है।पर्षद का मानना है कि आधुनिक दौर में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ शिक्षा, समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों से भी जोड़ना जरूरी है।
बाबा गरीबनाथ मंदिर कॉरिडोर पर भी फोकस
मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ मंदिर के विकास को लेकर भी पर्षद ने जानकारी साझा की। मंदिर के प्रस्तावित कॉरिडोर पर पर्यटन विभाग की ओर से काम किए जाने की बात कही गई है।कॉरिडोर परियोजना के जरिए मंदिर परिसर और उसके आसपास श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना है। इसके तहत धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ मंदिर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को नया स्वरूप देने पर भी जोर दिया जा सकता है।
मंदिरों की जमीन पर अवैध कब्जे पर सख्ती
धार्मिक स्थलों के विकास के साथ मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा का मुद्दा भी पर्षद के एजेंडे में है। मंदिरों की जमीन पर कथित अवैध कब्जे को लेकर पर्षद ने सख्त रुख अपनाया है।बताया गया कि मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। अवैध कब्जे के मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।इस कदम का उद्देश्य धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों को सुरक्षित रखना और उनका इस्तेमाल धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए सुनिश्चित करना है।
मंदिरों की आय से स्कूल-कॉलेज खोलने की अपील
पर्षद की ओर से धार्मिक संस्थानों को केवल पूजा-पाठ तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक विकास में भी भूमिका निभाने की अपील की गई है। सक्षम मठ-मंदिरों से स्कूल और कॉलेज खोलने की दिशा में आगे आने का आग्रह किया गया है।इस पहल के पीछे सोच यह है कि धार्मिक संस्थानों की उपलब्ध संसाधनों और आय का इस्तेमाल शिक्षा, समाजसेवा और युवा विकास के लिए भी किया जा सके।
सनातन संस्कृति के साथ शिक्षा और सामाजिक सेवा पर जोर
बिहार में प्रस्तावित धार्मिक युवा सम्मेलन और मंदिरों के विकास से जुड़ी पहल को एक व्यापक अभियान के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें एक तरफ युवाओं को सनातन संस्कृति और भारतीय परंपराओं से जोड़ने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ धार्मिक संस्थानों को शिक्षा और सामाजिक सेवा से जोड़ने का प्रयास भी दिखाई दे रहा है।अब निगाहें राज्यस्तरीय सम्मेलन की आधिकारिक तारीख और उसके एजेंडे पर रहेंगी। सम्मेलन में किन विषयों पर चर्चा होती है और युवाओं की भागीदारी किस तरह सुनिश्चित की जाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।