मोदी शाह करीबी माने जाने वाले योग गुरु बाबा रामदेव के सुर अब अचानक बदल गए हैं। देश के मौजूदा हालात और सरकारी तंत्र पर अब तक का सबसे बड़ा विस्फोट करते हुए बाबा रामदेव ने ऐसा बयान दिया है, जिसने दिल्ली के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है! मीडिया से बातचीत करते हुए बाबा रामदेव ने साफ़ तौर पर कहा कि देश की हालत बिल्कुल सही नहीं है। लगता हमे मैदान में उतर कर एक बार सरकार के खिलाफ आंदोलन करना पड़ेगा उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आज देश में नौकरियां बेची जा रही हैं और सरकारी इंटरव्यू में 90 से 99 फ़ीसदी तक घपला हो रहा है! अपने जाति, वर्ग और विचारधारा के लोगों को नौकरियां दी जा रही हैं और बाकी काबिल युवाओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलते हुए उन्होंने कहा कि छोटे स्कूलों में लाइट, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, और जहाँ सब कुछ है, वहाँ पेपर लीक और नकल का खेल चल रहा है।रामदेव ने देश में बढ़ती राजनीतिक और जातीय नफरत पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे के खिलाफ ऐसे खड़े हैं, जैसे हिंदुस्तान और पाकिस्तान आमने-सामने हों। उन्होंने सत्ता पक्ष को माता-पिता की तरह सभी के साथ समान व्यवहार करने की सलाह दी।

अब सवाल यही है कि रामदेव का निशाना आखिर किस तरफ था? क्या उनकी बात सिर्फ व्यवस्था पर सवाल है या फिर मोदी सरकार के लिए सीधा राजनीतिक संदेश? रामदेव के बयान पर अखिलेश यादव ने भी तंज कसते हुए लिखा—“आसन बदल गए हैं।” यानी विपक्ष ने रामदेव के बदले तेवरों को तुरंत सियासी मुद्दा बना लिया है। और यह बयान ऐसे वक्त आया है जब आरक्षण, यूजीसी, पेपर लीक और रोजगार को लेकर युवाओं के बीच नाराजगी की चर्चाएं तेज हैं और 2027 का यूपी चुनाव भी करीब है। ऐसे में बीजेपी के पुराने समर्थक माने जाने वाले रामदेव की यह नाराजगी आने वाले चुनावी माहौल पर कितना असर डालेगी, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।क्योंकि सवाल सिर्फ बाबा रामदेव के बयान का नहीं है… सवाल यह है कि क्या बीजेपी के अपने खेमे से उठती ये आवाजें आने वाले वक्त में किसी बड़े सियासी बदलाव का संकेत हैं?