आरा में दिखा लालू यादव का ठेठ गंवई अंदाज, गोड़ नाच और लोकगीतों का लिया आनंद
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव मंगलवार को आरा के अगिआंव पहुंचे, जहां उन्होंने पूर्व आरजेडी विधायक अरुण यादव के पिता स्वर्गीय भुनेश्वर यादव की तृतीय पुण्यतिथि कार्यक्रम में हिस्सा लिया, लालू यादव ने स्वर्गीय भुनेश्वर यादव की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और हवन-पूजन में भी शामिल हुए, कार्यक्रम के दौरान लालू यादव का पुराना और खास गंवई अंदाज भी देखने को मिला, उन्होंने मंच पर प्रस्तुत भोजपुर की पारंपरिक लोक कला गोड़ नाच और लोकगीतों का काफी देर तक आनंद लिया, कलाकारों की प्रस्तुति से प्रभावित होकर उन्होंने उन्हें नकद राशि देकर सम्मानित और प्रोत्साहित भी किया।
पुष्पांजलि के बाद हवन-पूजन में हुए शामिल
आरा के अगिआंव स्थित पूर्व आरजेडी विधायक अरुण यादव के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में लालू यादव ने सबसे पहले स्वर्गीय भुनेश्वर यादव की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें नमन किया, इसके बाद वे हवन-पूजन में शामिल हुए, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने अग्निकुंड में आहुति देकर धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया।

गोड़ नाच और लोकगीतों ने बांधा समां
पुण्यतिथि कार्यक्रम के दौरान भोजपुर की समृद्ध लोक संस्कृति से जुड़ी पारंपरिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं, मंच पर कलाकारों ने गोड़ नाच और लोकगीत प्रस्तुत किए, लालू यादव काफी देर तक मंच पर बैठे रहे और कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद लेते नजर आए, लोक कलाकारों के हुनर और गायकी से प्रभावित होकर आरजेडी प्रमुख ने अपने हाथों से उन्हें नकद राशि देकर सम्मानित किया, उनके इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं का भी ध्यान खींचा।
ढाई से तीन घंटे तक कार्यक्रम में रहे लालू
लालू प्रसाद यादव इस पूरे आयोजन के दौरान करीब ढाई से तीन घंटे तक मौजूद रहे। उनके अगिआंव पहुंचने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में आरजेडी कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए, कार्यकर्ताओं में अपने नेता की एक झलक पाने को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया, कार्यक्रम के दौरान श्रद्धांजलि के साथ-साथ भोजपुर की लोक संस्कृति और लालू यादव का पुराना अंदाज भी देखने को मिला।
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‘लोक परंपरा को जिंदा रखने का काम’
आरजेडी एमएलसी सोनू राय ने लालू यादव के लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने की तारीफ की उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव का आम लोगों और अपनी मिट्टी से जुड़ने का अंदाज अलग है, सोनू राय के मुताबिक, गोड़ऊ नाच जैसी लोक परंपराओं को बढ़ावा देना सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि पुरानी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का प्रयास भी है, उन्होंने कहा कि अगर आज की युवा पीढ़ी इन लोक कलाओं को अपनी आंखों से नहीं देखेगी, तो आने वाले समय में ये परंपराएं केवल किताबों तक सीमित रह सकती हैं।
कलाकारों के सम्मान और रोजगार से जुड़ा प्रोत्साहन
सोनू राय ने कहा कि लोक कलाकारों को मंच और आर्थिक सहयोग मिलने से उनके सम्मान के साथ-साथ रोजगार का रास्ता भी मजबूत होता है, उन्होंने कहा कि अपनी पुरानी परंपराओं और लोक कलाओं का सम्मान करना हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है, आरा के अगिआंव में आयोजित यह कार्यक्रम एक तरफ जहां स्वर्गीय भुनेश्वर यादव की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि का अवसर बना, वहीं दूसरी ओर भोजपुर की पारंपरिक लोक संस्कृति को भी मंच मिला, लालू यादव का कलाकारों के साथ बैठकर लोकगीत और गोड़ नाच देखना तथा उन्हें सम्मानित करना पूरे आयोजन की खास चर्चा का विषय रहा।