नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पिछले एक महीने में चीनी का खुदरा भाव करीब 47 रुपये से बढ़कर 61 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने के बीच सरकार ने बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक लिमिट लागू करने का फैसला किया है।इसके साथ ही सरकार ने करीब 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति भी दी है। माना जा रहा है कि इन फैसलों का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
1 सितंबर से 30 नवंबर तक स्टॉक लिमिट
फूड मिनिस्ट्री के नोटिफिकेशन के अनुसार, महीने में 10 टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करने वाले बल्क कंज्यूमर्स पर 1 सितंबर से 30 नवंबर तक स्टॉक लिमिट लागू रहेगी।ऐसे उपभोक्ता अपने सामान्य उपयोग के मुताबिक अधिकतम 15 दिनों की जरूरत के बराबर चीनी का स्टॉक रख सकेंगे।इस दायरे में कई तरह की खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां शामिल हैं।
इन उपभोक्ताओं पर लागू होगी स्टॉक लिमिट
स्टॉक लिमिट के दायरे में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- कन्फेक्शनरी निर्माता
- सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनियां
- फूड प्रोसेसिंग यूनिट
- मिठाई निर्माता
- अन्य बड़े औद्योगिक चीनी उपभोक्ता
सरकार का यह कदम चीनी की जमाखोरी को रोकने और बाजार में उपलब्धता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति
चीनी की घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कॉमर्स मिनिस्ट्री ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) स्कीम के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है।बताया जा रहा है कि करीब एक दशक में यह पहला मौका है जब भारत में इस तरह बड़े स्तर पर शुगर इंपोर्ट की अनुमति दी गई है।सामान्य स्थिति में चीनी के आयात पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लागू होता है। ऐसे में ड्यूटी-फ्री आयात का फैसला घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चीनी की कीमत 61 रुपये किलो तक पहुंचने से बढ़ी चिंता
पिछले एक महीने के दौरान चीनी की खुदरा कीमत में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। करीब 47 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर कीमत 61 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने से उपभोक्ताओं और कारोबारियों की चिंता बढ़ी है।चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे तौर पर मिठाई, बेकरी, कन्फेक्शनरी, सॉफ्ट ड्रिंक और अन्य खाद्य उत्पादों की लागत पर भी पड़ सकता है।
त्योहारी सीजन में कीमतों पर रहेगी नजर
आने वाले समय में सरकार के इन दोनों फैसलों का बाजार पर क्या असर पड़ता है, यह महत्वपूर्ण होगा। खासतौर पर आगामी त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है।त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत भी बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार की स्टॉक लिमिट और ड्यूटी-फ्री आयात से बाजार में आपूर्ति और कीमतों पर कितना असर पड़ता है, इस पर कारोबारियों और उपभोक्ताओं की नजर रहेगी।अगर घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ती है तो कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, वास्तविक असर आने वाले दिनों में बाजार की मांग और आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा।