लखनऊ में जापान से आए छात्रों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुस्कुराती तस्वीरें और आत्मीय मुलाकात का वीडियो सामने आया, तो इसकी चर्चा देशभर में होने लगी। लेकिन बच्चों के साथ मुख्यमंत्री की इस सहज मुलाकात ने अब सियासी रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर राजनीतिक मर्यादा और भाषा के स्तर पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में जापान से आए छात्रों से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छात्रों से बातचीत की और उनका उत्तर प्रदेश में गर्मजोशी से स्वागत किया। मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हुआ, जिसमें एक जापानी छात्र मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी लेता नजर आया। सीएम योगी भी छात्र के साथ सहज और मुस्कुराते हुए दिखाई दिए। लेकिन इसी वीडियो को समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने निशाना बनाते हुए सोशल मीडिया पर शेयर किया। पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा गया, “इसी तरह जब कोई बच्चा चिड़ियाघर में जाता है तो ऐसे ही हंसता-मुस्कुराता है।”
सपा की इस टिप्पणी के बाद अब सियासत गरमा गई है। सवाल उठ रहा है कि जब मुख्यमंत्री अपने प्रदेश में आए विदेशी छात्रों का स्वागत कर रहे थे और उनके साथ सामान्य एवं सौहार्दपूर्ण मुलाकात कर रहे थे, तो क्या इस तरह का कटाक्ष राजनीतिक मर्यादा के दायरे में आता है?
विपक्षी दलों का सरकार की नीतियों, फैसलों और कामकाज पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या राजनीतिक विरोध की भाषा इतनी व्यक्तिगत होनी चाहिए कि एक सामान्य मुलाकात भी सियासी तंज का विषय बन जाए?
खास तौर पर तब, जब मुलाकात में विदेशी छात्र शामिल हों और संदेश भारत-जापान के आपसी संबंधों, युवा संवाद और सांस्कृतिक जुड़ाव से जुड़ा हो। ऐसे में सोशल मीडिया पोस्ट की भाषा को लेकर बहस होना स्वाभाविक है।
फिलहाल, जापानी छात्रों के साथ मुख्यमंत्री योगी की मुलाकात से ज्यादा चर्चा अब उस पर किए गए सपा के तंज की हो रही है। सवाल सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि उस भाषा और मर्यादा का भी है, जिसे सार्वजनिक जीवन में बनाए रखने की उम्मीद की जाती है।