लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में UGC से जुड़े प्रस्तावों और आरक्षण सुधार के विरोध में रविवार को सवर्ण समाज जागृति यात्रा निकाली गई। सवर्ण मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में ब्राह्मण, ठाकुर समेत विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार और राजनीतिक दलों के खिलाफ नारेबाजी की तथा कथित तौर पर प्रस्तावित प्रावधानों को वापस लेने की मांग की।प्रदर्शन का आयोजन वीमेन पावर लाइन चौराहे के पास किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। आयोजकों के मुताबिक, प्रदर्शन में 300 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘संवैधानिक अछूत’ जैसे संदेश लिखी तख्तियां थीं। करीब आधे घंटे तक चौराहे पर प्रदर्शन और नारेबाजी का सिलसिला चलता रहा।
UGC प्रस्ताव वापस लेने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने UGC से जुड़े प्रावधानों को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े किसी भी बदलाव पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की सहमति जरूरी है। प्रदर्शन के दौरान UGC रोलबैक की मांग को लेकर लगातार नारे लगाए गए।सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यवस्था उनके हितों के खिलाफ है। उन्होंने इसे स्वीकार नहीं करने की बात कहते हुए सरकार से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने की मांग की।
सांसद-विधायकों की सांकेतिक अर्थी निकाली
प्रदर्शन के दौरान विरोध का एक अलग तरीका भी देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने सांकेतिक रूप से सांसदों और विधायकों की अर्थी निकाली। इस दौरान ‘नेता हमारा मुर्दा है’ जैसे नारे लगाए गए। आयोजकों ने इसे राजनीतिक दलों के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करने का सांकेतिक तरीका बताया।इसके बाद प्रदर्शनकारी बैकुंठ धाम की ओर बढ़े। पुलिस की मौजूदगी में विरोध यात्रा आगे बढ़ाई गई। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात रहा।
प्रदर्शन से कई रास्तों पर यातायात प्रभावित
बड़ी संख्या में लोगों के सड़क पर उतरने के कारण आसपास के कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। चौराहे के आसपास वाहनों की आवाजाही धीमी होने से कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बनी। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने और यातायात को नियंत्रित करने की कोशिश की।बताया गया कि यह प्रदर्शन संदीप सिंह के आह्वान पर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे आरक्षण और UGC से जुड़े ऐसे किसी भी प्रावधान को स्वीकार नहीं करेंगे, जिसे वे अपने अधिकारों के खिलाफ मानते हैं।
‘काला कानून स्वीकार नहीं’
प्रदर्शन के दौरान सवर्ण समाज के लोगों ने कहा कि वे कथित तौर पर भेदभावपूर्ण प्रावधानों का विरोध जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए वापस लेने की मांग की।हालांकि, प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों और UGC से जुड़े प्रस्तावों को लेकर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष अलग हो सकता है। ऐसे में पूरे मामले में आगे होने वाली सरकारी कार्रवाई और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।लखनऊ में हुआ यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब UGC, आरक्षण व्यवस्था और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर देश के अलग-अलग हिस्सों में बहस जारी है। अब देखना होगा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सरकार और संबंधित संस्थाएं क्या रुख अपनाती हैं।
