लखनऊ। राजधानी लखनऊ में नगर निगम द्वारा जब्त की गई भैंसों की नीलामी को लेकर सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। पारा क्षेत्र में अवैध डेयरियों और अतिक्रमण के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद जब्त किए गए पशुओं की नीलामी का समाजवादी पार्टी (सपा) और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। सपा विधायक अरमान खान समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और नीलामी रोकने की मांग की।
विरोध के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाकर ईको गार्डन भेज दिया। हालांकि, विरोध के बावजूद नगर निगम ने नीलामी प्रक्रिया जारी रखी।
पारा में नगर निगम टीम पर हमले के बाद हुई थी कार्रवाई
पूरा मामला लखनऊ के पारा क्षेत्र में अवैध डेयरियों और सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई से जुड़ा है। 16 अगस्त को नगर निगम और पुलिस की टीम कार्रवाई के लिए पहुंची थी। इसी दौरान टीम पर कथित हमले और एक दारोगा के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी।इसके बाद पुलिस और नगर निगम ने कार्रवाई तेज करते हुए 17 और 18 अगस्त को अभियान चलाया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कुल 243 पशु, जिनमें 242 भैंस और एक भैंसा शामिल था, कांजी हाउस भेजे गए।नगर निगम के अनुसार कार्रवाई का उद्देश्य अवैध डेयरियों और सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं से जुड़ी समस्याओं पर नियंत्रण करना था। वहीं, पशुपालकों और उनके समर्थकों का कहना है कि कार्रवाई से उनकी आजीविका प्रभावित हुई है।
नीलामी रोकने पहुंचे सपा विधायक अरमान खान
जब नगर निगम ने जब्त पशुओं की नीलामी शुरू की तो सपा और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता विरोध में उतर आए। नगर निगम मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया और नीलामी रोकने की मांग की गई।लखनऊ पश्चिम से सपा विधायक अरमान खान भी समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को लिखित पत्र देकर नीलामी रोकने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिन पशुपालकों की रोजी-रोटी इन पशुओं पर निर्भर है, उन्हें अपना पक्ष रखने और पशु वापस लेने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों में धक्का-मुक्की
नीलामी के विरोध में प्रदर्शन बढ़ने के बाद मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया, जिसके दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।जानकारी के अनुसार, पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया। नीलामी स्थल पर भी तनाव की स्थिति बनी रही।एक रिपोर्ट में नीलामी में शामिल होने सीतापुर से आए एक युवक के साथ मारपीट और उसके दस्तावेज छीनने का आरोप भी सामने आया है। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।
40 भैंसों की नीलामी 12.01 लाख रुपये में
विरोध और हंगामे के बावजूद नगर निगम ने नीलामी प्रक्रिया जारी रखी। ठाकुरगंज कांजी हाउस में रखी 40 भैंसों का बेस प्राइस 21 हजार रुपये प्रति भैंस निर्धारित किया गया था।नीलामी में मोहम्मद शाकिर ने 12.01 लाख रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाकर 40 भैंसें खरीदीं।हालांकि, यह कुल जब्त पशुओं की नीलामी का केवल एक हिस्सा था। अन्य कांजी हाउस में रखे पशुओं की नीलामी को लेकर भी विवाद और राजनीतिक विरोध सामने आया।
नीलामी की पारदर्शिता पर उठे सवाल
विरोध कर रहे सपा नेताओं और पशुपालकों ने नीलामी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि प्रभावित पशुपालकों की समस्याओं पर पर्याप्त विचार किए बिना नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।दूसरी ओर, नगर निगम की कार्रवाई को अवैध डेयरियों, सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं से जुड़ी समस्याओं और नगर निगम-पुलिस टीम पर हुए कथित हमले के बाद की कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।ऐसे में इस पूरे मामले में नीलामी की पारदर्शिता, पशुपालकों को मिले कानूनी अवसर और जब्त पशुओं की स्थिति अहम मुद्दे बन गए हैं।
नीलामी हॉल में नेताओं की मौजूदगी पर भी विवाद
नीलामी के दौरान सपा विधायक और कुछ पार्षदों की नीलामी हॉल में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं। आरोप लगाया गया कि बाहर से आए कुछ खरीदारों पर दबाव का माहौल बना, जिससे वे खुलकर बोली नहीं लगा सके।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों के आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है। लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने नीलामी हॉल में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगे जाने की बात कही है।
अखिलेश यादव ने पशुपालक परिवारों से की मुलाकात
मामले ने राजनीतिक रंग तब और पकड़ लिया जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रभावित पशुपालक परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया और पार्टी की ओर से उनके साथ खड़े रहने की बात कही।
सपा का कहना है कि छोटे और गरीब पशुपालकों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए। पार्टी ने नीलामी रोकने और प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग की है।
पुलिस टीम पर कथित हमले से जुड़ा है पूरा विवाद
लखनऊ भैंस नीलामी विवाद की शुरुआत पारा क्षेत्र में नगर निगम और पुलिस की कार्रवाई के दौरान हुए कथित हमले से हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान टीम पर पथराव और एक दारोगा के साथ हाथापाई की घटना सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।
अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ सरकारी टीम पर हमला करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करना और दूसरी तरफ जब्त पशुओं तथा उनसे जुड़े पशुपालक परिवारों के मामले का नियमानुसार समाधान करना।
आगे क्या होगा?
लखनऊ में 243 भैंसों की नीलामी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले समय में नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता, पशुपालकों को मिले अवसर और जब्त पशुओं की कानूनी स्थिति पर प्रशासन का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।फिलहाल नगर निगम ने नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है, जबकि सपा और प्रभावित पशुपालक इसका विरोध कर रहे हैं।
