मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विश्व बैंक वित्तपोषित यूपी-एग्रीज परियोजना के तहत गूगल एवं नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी, आईटीसी और एक्वाब्रिज के साथ हुए समझौते उत्तर प्रदेश की कृषि को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। इन साझेदारियों के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 और बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में वृद्धि पर काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बुधवार को यूपी-एग्रीज परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश विविधीकृत कृषि सहायता परियोजना (यूपीडीएएसपी) के साथ इन संस्थाओं के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। सीएम योगी ने कहा कि यूपी-एग्रीज का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय, जलवायु अनुकूल खेती, वैल्यू एडिशन, बाजार और ग्रामीण उद्यमिता को एक साथ मजबूत करना है।
सीएम ने कहा कि करीब 4,000 करोड़ रुपये की विश्व बैंक समर्थित परियोजना का मुख्य फोकस पूर्वी यूपी और बुंदेलखंड है। इन दोनों क्षेत्रों के 28 जनपदों के 123 विकासखंडों में परियोजना लागू की जा रही है। इसके तहत करीब 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए 10 लाख किसानों, 35 हजार मत्स्य उत्पादक किसानों और 3 लाख महिलाओं को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि खरीफ 2026 में 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को परियोजना के दायरे में लाया गया है। रबी 2026-27 में भी 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं, मटर, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का उद्देश्य किसान को सिर्फ उत्पादक नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि अर्थव्यवस्था का साझेदार बनाना है।
गूगल और नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी के साथ साझेदारी में ओपन नेटवर्क फॉर एग्रीकल्चर विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को एक ही डिजिटल इंटरफेस के जरिए मौसम, बाजार भाव, मिट्टी की स्थिति, कृषि सलाह और एग्रीटेक सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है। इससे एग्रीटेक स्टार्टअप और कंपनियां भी बड़ी संख्या में किसानों तक अपनी सेवाएं पहुंचा सकेंगी।
यूपी-एग्रीज के तहत आईटीसी के साथ साझेदारी कर धान और गेहूं के क्लाइमेट रेजिलिएंट कमोडिटी क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। दो लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में क्लाइमेट स्मार्ट कृषि का विस्तार प्रस्तावित है। इसमें शून्य जुताई, डायरेक्ट सीडेड राइस, जलवायु अनुकूल उन्नत बीज और वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।
बहराइच में 1,500 एकड़ क्षेत्र में निर्धारित मानकों के अनुरूप धान क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके जरिए प्रति एकड़ किसान की आय में 20 से 30 प्रतिशत वृद्धि, यूरिया के इस्तेमाल में 25 प्रतिशत कमी तथा श्रम और सिंचाई लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक बचत का लक्ष्य रखा गया है। खरीफ 2026 में 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इसके साथ मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, तिल, उड़द और मूंगफली जैसी फसलों को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है।
सीएम योगी ने कहा कि यूपी-एग्रीज के तहत धान, गेहूं, मिर्च, मक्का, हरी मटर और टमाटर जैसी फसलों के लिए निजी कंपनियों के साथ साझेदारी की जा रही है। इससे किसानों को बेहतर बाजार और खरीद की सुविधा मिल सकेगी। सरकार उत्पादन से लेकर संग्रहण, भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास मेगा फूड पार्क और एग्री एक्सपोर्ट सेंटर विकसित करने का प्रस्ताव भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य कृषि उपज को मंडी से आगे प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, लॉजिस्टिक्स और निर्यात से जोड़ना है।
एक्वाब्रिज के साथ साझेदारी के जरिए मत्स्य पालन को पारंपरिक गतिविधि से निकालकर टेक्नोलॉजी आधारित उद्यम के रूप में विकसित किया जाएगा। मत्स्य किसानों, सहकारी समितियों और उद्यमियों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। एआई आधारित एक्वाकल्चर मैनेजमेंट, ऑटोमैटिक फीडिंग तकनीक और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्नाव में आईएमसी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत 60 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर परियोजना विकसित की जा रही है। इसमें हैचरी, फीड मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग फैसिलिटी और प्रशिक्षण केंद्र प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी-एग्रीज का मूल दर्शन प्रोडक्टिविटी, टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट रेजिलिएंस, मार्केट, एंटरप्राइज और फार्मर प्रॉस्पैरिटी है। सरकार का लक्ष्य खेतों को डिजिटल, खेती को क्लाइमेट स्मार्ट, उत्पादन को गुणवत्ता आधारित और बाजार को वैश्विक बनाकर किसानों की आय में वृद्धि करना है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की कृषि केवल मिट्टी और मौसम पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि डेटा साइंस, तकनीक और मार्केट इंटेलिजेंस भी इसकी दिशा तय करेंगे। यूपी-एग्रीज के जरिए उत्तर प्रदेश के किसानों को इसी भविष्य की कृषि व्यवस्था के लिए तैयार किया जा रहा है।
