राजधानी के पॉश इलाके अलीगंज सेक्टर-G में शनिवार की रात पूर्व डीजीपी (कर्नाटक) महेंद्र कुमार श्रीवास्तव के घर में लाखों की चोरी की घटना ने लखनऊ पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में हुई इस बड़ी वारदात ने पुलिस की चौकसी और गश्त व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूर्व पुलिस प्रमुख के घर में सेंध, पुलिस गश्त पर उठे सवाल
यह वारदात किसी आम नागरिक के घर नहीं, बल्कि एक ऐसे अधिकारी के घर में हुई है जो खुद राज्य पुलिस के सर्वोच्च पद पर रह चुके हैं। पूर्व डीजीपी के घर में चोरी होना यह दर्शाता है कि राजधानी में चोरों के हौसले कितने बुलंद हैं और पुलिस गश्त महज़ दिखावा बनकर रह गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है
रात में गश्त के नाम पर पुलिस वाहन तो गुजरते हैं, लेकिन किसी को रोक-टोक या जांच नहीं की जाती।
घर से लाखों के गहने और नकदी गायब
जानकारी के अनुसार, चोर घर का मुख्य ताला तोड़कर अंदर घुसे और लाखो के जेवरात साथ ही करीब दो लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गए।घटना के बाद जब परिवार लौटकर आया तो घर के दरवाजे टूटे मिले और पूरा सामान बिखरा पड़ा था।
VIP एरिया में पुलिस नाकाम — 100 कदम की दूरी पर जज का मकान
वारदात उस इलाके में हुई जहां सीनियर जज, सेवानिवृत्त अधिकारी और पुलिस के कई वरिष्ठ अफसर रहते हैं।
पूर्व डीजीपी के घर से मात्र 100 कदम की दूरी पर सीनियर जज का सरकारी आवास है। बावजूद इसके पुलिस को भनक तक नहीं लगी। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि अगर इतने वीआईपी इलाके में पुलिस गश्त का यह हाल है तो आम इलाकों की सुरक्षा की स्थिति क्या होगी?
सूत्र बोले—वारदात के दौरान न थी कोई पुलिस पेट्रोलिंग
सूत्रों के मुताबिक- चोरी के वक्त इलाके में कोई सक्रिय पुलिस गश्त नहीं थी। गश्त दल के गुजरने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। लोगों ने बताया कि रात में अक्सर अलीगंज क्षेत्र में गश्त वाहन कुछ देर घूमकर लौट जाते हैं, पर निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर है।
पुलिस की धीमी कार्रवाई पर भी सवाल
वारदात की सूचना के बाद पुलिस मौके पर तो पहुंची, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार कछुआ चाल की रही। घटना स्थल पर फोरेंसिक टीम देर से पहुंची, वहीं शुरुआती जांच में पुलिस ने पड़ोसियों या आस-पास के CCTV कैमरे भी समय पर खंगालने में लापरवाही दिखाई। लोगों का आरोप है कि पुलिस सिर्फ औपचारिकता निभा रही है।
इलाके में दहशत, लोगों ने उठाई सवालों की झड़ी
वारदात के बाद इलाके में भय और आक्रोश दोनों का माहौल है। स्थानीय लोगों ने कहा कि जब पूर्व डीजीपी जैसे अधिकारी का घर सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगा। निवासियों ने रात की गश्त बढ़ाने और इलाके के CCTV कैमरों को दुरुस्त करने की मांग की है।
पूर्व DGP का दर्द— ‘सिस्टम पर भरोसा था, अब डर है
पूर्व डीजीपी महेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा,
“हम परिवार सहित बाहर गए थे। लौटे तो देखा कि घर के ताले टूटे पड़े हैं और सारा सामान बिखरा हुआ है। गहने और नकदी सब गायब हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पुलिस इतनी नाकाम रही, जबकि यह इलाका वीआईपी जोन में आता है।”
पुलिस का दावा—जांच जारी, जल्द होगा खुलासा
थाना अलीगंज पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। थाना प्रभारी ने बताया कि “CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और कुछ संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है।” हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे दावे हर बड़ी चोरी के बाद दोहराए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई कभी नतीजे तक नहीं पहुंचती।



