FIR में देरी, पॉक्सो न लगाने पर कार्रवाई, SHO–चौकी इंचार्ज निलंबित
लखनऊ। सचेंडी दुष्कर्म मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद आखिरकार विभाग को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा। मामले में FIR देर से दर्ज करने, पॉक्सो एक्ट की धाराएं न लगाने और अज्ञात के खिलाफ मुकदमा लिखने जैसी घोर चूक पर कई पुलिस अधिकारियों पर गाज गिरी है।
FIR में देरी और पॉक्सो न लगाने पर कार्रवाई
मामले की शुरुआती जांच में सामने आया कि पीड़िता के साथ हुए गंभीर अपराध के बावजूद समय पर FIR दर्ज नहीं की गई। इसके साथ ही नाबालिग होने के बावजूद पॉक्सो एक्ट की धाराएं जानबूझकर नहीं लगाई गईं, जिससे पुलिस की नीयत और कार्यप्रणाली दोनों पर सवाल खड़े हो गए।
SHO और चौकी इंचार्ज निलंबित लापरवाही के आरोप में
SHO सचेंडी विक्रम सिंह को निलंबित किया गया
चौकी इंचार्ज दिनेश कुमार को भी सस्पेंड किया गया
इन दोनों पर मामले को दबाने और सही कानूनी कार्रवाई न करने के गंभीर आरोप हैं।
ACP लाइन हाजिर, DCP पश्चिमी हेडक्वार्टर अटैच
मामले में उच्च स्तर की जिम्मेदारी तय करते हुए
ACP पनकी शिखर को लापरवाही के चलते लाइन हाजिर किया गया
DCP पश्चिमी दिनेश त्रिपाठी को CP हेडक्वार्टर से अटैच कर दिया गया
यह कार्रवाई साफ दर्शाती है कि मामला सिर्फ थाना स्तर की गलती नहीं था, बल्कि पूरी चेन में लापरवाही हुई।
पत्रकार अभियुक्त गिरफ्तार, स्कॉर्पियो सीज
मामले में एक अभियुक्त पत्रकार शिवचरण यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। अपराध में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी को भी पुलिस ने सीज कर लिया है।
FIR के बाद आनन-फानन में दिखी सक्रियता
कार्रवाई सामने आने के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए पीड़िता के 164 के बयान दर्ज कराए तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया बालिका को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई सवाल यह है कि यह संवेदनशीलता शुरुआत में क्यों नहीं दिखाई गई?
मुआवजे का प्रस्ताव भेजा गया
पीड़िता को सरकारी कॉम्पनसेशन (मुआवजा) देने के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है, लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए, सिर्फ कागजी मदद नहीं।
फरार SI की तलाश में 6 टीमें, 50 हजार का इनाम
मामले में फरार SI अमित मौर्य की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की 6 टीमें गोरखपुर, बस्ती, प्रयागराज, सूरत, जौनपुर और लखनऊ में दबिश दे रही हैं। फरार SI पर 50 हजार का इनाम घोषित किया गया है।
सवालों के घेरे में उत्तर प्रदेश पुलिस
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना दबाव के यह कार्रवाई होती? क्या FIR समय पर दर्ज होती तो पीड़िता को और पीड़ा न झेलनी पड़ती? क्या पॉक्सो जैसी सख्त धारा जानबूझकर नहीं लगाई गई? यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की संवेदनहीनता, लापरवाही और सिस्टम फेलियर का एक और उदाहरण बनकर सामने आया है। अब देखना यह होगा कि फरार SI की गिरफ्तारी कब होती है और दोषियों पर सख्त सजा कब तक सुनिश्चित की जाती है — या फिर मामला समय के साथ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।


