दुनिया भर में बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले लगातार चिंता का विषय बनते जा रहे हैं, हाल ही में सामने आए आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण एशिया के देशों में भी बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पाकिस्तान में बाल दुर्व्यवहार के मामले
इस्लामाबाद स्थित गैर-लाभकारी संगठन Sahil की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में पाकिस्तान में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के 3,630 मामले सामने आए, इसका मतलब है कि वहां औसतन हर दिन 9 से अधिक बच्चे किसी न किसी प्रकार की हिंसा का शिकार हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ितों में 1,924 लड़कियां, 1,625 लड़के और 116 नवजात शिशु शामिल थे, यह आंकड़े देश के 81 अलग-अलग अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर एकत्र किए गए हैं।
किन अपराधों के मामले सबसे ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में बच्चों के खिलाफ दर्ज मामलों में
- 1,107 मामले अपहरण के
- 596 मामले अप्राकृतिक यौन शोषण के
- 522 मामले बलात्कार के
इसके अलावा लापता बच्चों, बलात्कार के प्रयास और सामूहिक यौन अपराधों के भी कई मामले सामने आए, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 11 से 15 वर्ष की आयु के बच्चे सबसे अधिक जोखिम में पाए गए। कई मामलों में आरोपी पीड़ितों के परिचित ही थे, अगर प्रांतों की बात करें तो पंजाब में 73%, सिंध में 21%, जबकि अन्य क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम मामले दर्ज किए गए।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा में भी वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में साल 2025 के दौरान महिलाओं के खिलाफ हिंसा के 7,071 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक हैं।
भारत में बच्चों के खिलाफ अपराध के आंकड़े
भारत में बच्चों के खिलाफ अपराध के आधिकारिक आंकड़े National Crime Records Bureau जारी करता है, एनसीआरबी के अनुसार भारत में हर साल बच्चों के खिलाफ लगभग 1.7 से 1.8 लाख मामले दर्ज होते हैं, यानी औसतन हर दिन करीब 480 से 500 बच्चे किसी न किसी अपराध का शिकार होते हैं, आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में ऐसे मामलों की संख्या लगभग 89,000 थी, जो बढ़कर 2022 में 1.6 लाख से अधिक हो गई। वहीं 2023 में कुल 1,77,335 मामले दर्ज किए गए।
अपराधों की प्रकृति
भारत में बच्चों के खिलाफ अपराधों में करीब 45% मामले अपहरण के लगभग 38% मामले यौन अपराधों के होते हैं, जो Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO) के तहत दर्ज किए जाते हैं।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा मामले
मध्य प्रदेश में लगभग 22,393 मामले दर्ज हुए और यह पहले स्थान पर रहा,
इसके बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी बड़ी संख्या में मामले सामने आए।
रिपोर्टिंग सिस्टम भी महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग देशों में कानून और रिपोर्टिंग प्रणाली अलग होती है, इसलिए आंकड़ों की सीधी तुलना करना आसान नहीं होता, कई मामलों में अपराध दर्ज ही नहीं हो पाते, जिससे वास्तविक स्थिति का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि आंकड़े यह संकेत जरूर देते हैं कि बच्चों के खिलाफ अपराध एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुके हैं, ऐसे में सरकार, समाज और परिवार सभी की जिम्मेदारी है कि बच्चों को सुरक्षित माहौल दिया जाए और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।




