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योगी सरकार की योजनाओं का असर: स्वयं सहायता समूह से कमाई कर बनीं आत्मनिर्भर

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*बरेली के फतेहगंज पश्चिमी ब्लॉक के छोटे से गांव घंघोरा-घंघोरी की रहने वाली नसरीन बी आज एक ऐसी मिसाल बन चुकीं हैं, जिनकी कहानी चर्चा का विषय है। एक समय था जब नसरीन अपने परिवार के पालन-पोषण को लेकर चिंतित रहती थीं, लेकिन आज वह अपने दम पर न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि गांव की 10 महिलाओं को रोजगार भी दिया। नसरीन बताती हैं कि उन्होंने सोचा भी नहीं था कि वह इतना नाम कमा पाएंगी। लेकिन जब उन्होंने “जनता” स्वयं सहायता समूह से जुड़कर काम शुरू किया, तो उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। योगी सरकार की मदद से हुई छोटी सी शुरुआत से शुरू हुआ यह सफर आज एक सफल बेकरी व्यवसाय में बदल चुका है, जहां रस्क, फैन और क्रीम रोल जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत नसरीन जैसी हजारों ग्रामीण महिलाओं को नई पहचान दी है। इसी योजना के तहत समूह गठन, बचत और वित्तीय सहायता के माध्यम से बहुत सी महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिला। 2022 में समूह को 15000 रुपये मिले और कुछ दिनों बाद 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी मिली। इस धन ने उनके व्यवसाय को मजबूत आधार दिया। इससे न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ा, बल्कि उन्होंने अपने साथ गांव की 10 अन्य महिलाओं को भी जोड़ लिया। आज यह समूह हर महीने 1 लाख रुपये तक की आमदनी कर रहा है। यह केवल आय का साधन नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान का भी प्रतीक बन चुका है। योगी सरकार की योजनाओं ने इन महिलाओं को “लाभार्थी” से “उद्यमी” बना दिया है।’

सरकार द्वारा मिली इस सहायता से उन्होंने क्रीम रोल बनाने की मशीन लगाई, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ी और नए रोजगार के अवसर भी बने। नई तकनीक और प्रशिक्षण के जरिए नसरीन ने अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार किया और बरेली शहर तक सप्लाई शुरू कर दी। उन्होंने उत्पादों के लिए उचित मूल्य निर्धारण किया और बाजार की मांग के अनुसार अपने कारोबार को आगे बढ़ाया। यह उदाहरण दिखाता है कि जब सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए, तो छोटे स्तर का काम भी बड़े व्यवसाय में बदल सकता है।

नसरीन की सफलता का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि उन्होंने अपनी तरक्की को केवल खुद तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने 10 महिलाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें भी रोजगार दिया और आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया। आज उनका समूह केवल बेकरी उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने पापड़, मसाले और चिप्स जैसे नए उत्पादों का निर्माण भी शुरू कर दिया है। इससे उनकी आय के स्रोत बढ़े हैं और बाजार में उनकी पहचान भी मजबूत हुई है। समूह की महिलाओं को नियमित ऑर्डर मिल रहे हैं और प्रशासनिक सहयोग से उनके उत्पादों का प्रचार-प्रसार भी हो रहा है। यह पहल न केवल आर्थिक मजबूती दे रही है, बल्कि समाज में महिलाओं की भूमिका को भी सशक्त बना रही है।

नसरीन ने यह साबित कर दिया कि अगर अवसर मिले और उसका सही उपयोग किया जाए, तो कोई भी महिला अपनी परिस्थितियों को बदल सकती है। आज नसरीन और उनका समूह न सिर्फ अपने परिवार का सहारा हैं, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। सरकार की ऐसी योजनाओं का लाभ मिलने से बहुत सी महिलाओं को न सिर्फ आर्थिक मदद मिली है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता, सम्मान और नई पहचान भी दी है।

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