महिला आरक्षण कानून को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गर्म होती नजर आ रही है। सरकार जहां इस कानून को लागू करने की दिशा में अपनी रणनीति तेज कर रही है, वहीं विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने महिला आरक्षण बिल का खुलकर समर्थन किया है। इकरा हसन ने कहा कि यह कानून काफी समय पहले पारित हो चुका था, लेकिन इसे लागू करने के लिए अब तक कोई स्पष्ट रोडमैप तैयार नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते वह इस फैसले का स्वागत करती हैं और चाहती हैं कि इसे जल्द से जल्द जमीन पर लागू किया जाए ताकि महिलाओं को राजनीति में अधिक अवसर मिल सकें।
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वहीं उत्तर प्रदेश AIMIM अध्यक्ष हाजी शौकत अली के विवादित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इकरा हसन ने साफ कहा कि भारत एक संवैधानिक देश है और आगे भी संविधान के अनुसार ही चलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार कोई भी हो, लेकिन संविधान सर्वोपरि रहेगा और सभी को कानून का पालन करना ही होगा। इधर सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार महिला आरक्षण बिल को लेकर गंभीर दिखाई दे रही है और इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने या मौजूदा सत्र की अवधि बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि अप्रैल के दूसरे या तीसरे सप्ताह में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद को फिर से बुलाया जा सकता है। हालांकि विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की है कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद ही बुलाई जाए। विपक्ष का मानना है कि इतने अहम विषय पर सभी दलों की सहमति जरूरी है।कुल मिलाकर महिला आरक्षण कानून को लेकर सियासत तेज हो गई है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।






