उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। एक ऐसा दिन जब देश के सबसे ताकतवर नेताओं का जमावड़ा नोएडा की धरती पर लगा और विकास के नाम पर एक नया अध्याय लिख दिया गया। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी जैसे बड़े चेहरे मौजूद थे और मौका था नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन का। यह कोई साधारण एयरपोर्ट नहीं है बल्कि इसे एशिया के सबसे बड़े और अत्याधुनिक एयरपोर्ट्स में गिना जा रहा है। कहा जा रहा है कि आने वाले समय में यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश का सबसे बड़ा हब बना सकता है और लाखों युवाओं को रोजगार देने का माध्यम भी बनेगा।
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सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यही वह नोएडा है जहां जाने से कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री डरते थे। एक मिथक बना दिया गया था कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है वह दोबारा सत्ता में नहीं लौटता। लेकिन योगी आदित्यनाथ ने इस राजनीतिक अंधविश्वास को भी तोड़ दिया। योगी न केवल नोएडा गए बल्कि वहां देश के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक का उद्घाटन भी कर दिया। कार्यक्रम के दौरान एक दिलचस्प नजारा तब देखने को मिला जब योगी आदित्यनाथ मंच पर पहुंचे और जनता का अभिवादन किया। पूरा पंडाल जय श्रीराम और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। माहौल ऐसा था जैसे जनता अपने मुख्यमंत्री को सुनने के लिए काफी उत्साहित थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से काफी प्रभावित नजर आए। मंच पर कई बार दोनों नेताओं के बीच बातचीत होती दिखाई दी। योगी आदित्यनाथ खुद प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट की विशेषताओं के बारे में बताते नजर आए और यह समझाते दिखाई दिए कि यह एयरपोर्ट किस तरह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगा। अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योगी सरकार की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश की पहचान अपराध और माफिया राज से होती थी, लेकिन आज वही उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर और एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जा रहा है। मोदी ने विपक्ष पर भी निशाना साधा और कहा कि पहले की सरकारों ने नोएडा को लूट और वसूली का अड्डा बना दिया था लेकिन अब यह क्षेत्र विकास का मॉडल बन चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश को चार बड़ी परियोजनाओं की सौगात मिली है जो युवाओं को रोजगार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। जेवर एयरपोर्ट का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। बताया जाता है कि सबसे पहले इस एयरपोर्ट का सपना रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देखा था जब वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय थे। 2003 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी भी मिल गई थी लेकिन बाद में सरकारें बदलती रहीं और यह प्रोजेक्ट फाइलों में दबकर रह गया। 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस प्रोजेक्ट को नई गति मिली।

25 नवंबर 2021 को इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और अब यह एयरपोर्ट जमीन पर खड़ा दिखाई दे रहा है। बीजेपी इसे योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। राजनीतिक तौर पर भी इस कार्यक्रम को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी अब अपनी विकास योजनाओं को जनता के बीच ले जाने की रणनीति बना रही है। पार्टी का मानना है कि 2017 से पहले और अब के उत्तर प्रदेश के फर्क को दिखाकर जनता का समर्थन हासिल किया जा सकता है। हालांकि विपक्ष भी लगातार हमलावर है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जेवर एयरपोर्ट को लेकर तंज कसते हुए कहा है कि वह भी वहां जाएंगे और देखेंगे कि उन्हें उतरने दिया जाता है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन किसानों की जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए ली गई है उन्हें सम्मान मिलना चाहिए और उन्हें उद्घाटन समारोह में प्रमुखता से जगह मिलनी चाहिए थी। इतना ही नहीं अखिलेश यादव 29 मार्च को नोएडा में एक बड़ी जनसभा करने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि वह 2027 के चुनाव अभियान की शुरुआत यहीं से कर सकते हैं। खास बात यह है कि जिन अखिलेश यादव पर यह आरोप लगता रहा कि वह अपने कार्यकाल में नोएडा नहीं गए, अब वही नोएडा से चुनावी बिगुल फूंकने जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जेवर एयरपोर्ट अब केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतीक भी बन चुका है। एक तरफ बीजेपी इसे विकास का प्रतीक बनाकर पेश कर रही है तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे किसानों और स्थानीय मुद्दों से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। इसके अलावा यह भी चर्चा है कि दिल्ली और लखनऊ के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने में संघ की भी महत्वपूर्ण भूमिका है ताकि 2027 चुनाव में कोई अंदरूनी मतभेद नुकसान न पहुंचा सके। कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन कई मायनों में खास रहा। यह उत्तर प्रदेश के विकास की नई कहानी भी है, राजनीतिक संदेश भी है और 2027 की सियासी लड़ाई की शुरुआत का संकेत भी। अब देखने वाली बात यह होगी कि बीजेपी इस विकास मॉडल को जनता के बीच कितना प्रभावी तरीके से ले जा पाती है और विपक्ष इसका क्या जवाब तैयार करता है। लेकिन इतना जरूर तय है कि जेवर एयरपोर्ट ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक नया मुद्दा दे दिया है और आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी मंचों पर बार-बार सुनाई देगा।






