
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में एक बार फिर जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई। बाराबनी, रामपुरहाट और बोलपुर विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित जनसभाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान की अपील की और राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
विपक्ष पर सीधा प्रहार, ‘डबल इंजन’ पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस, वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि राज्य में “टेरर, माफियाराज और भ्रष्टाचार” का माहौल बन चुका है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे भयमुक्त होकर मतदान करें और “डबल इंजन” वाली भाजपा सरकार को सत्ता में लाएं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास कार्यों को तेज गति मिली है और बंगाल में भी वही मॉडल लागू किया जाएगा।
कानून-व्यवस्था और विकास पर तुलना
योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले वहां भी अराजकता और दंगों का माहौल था, लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। उन्होंने दावा किया कि यूपी में अब शांति और सुरक्षा का माहौल है, जबकि बंगाल में अभी भी अपराध और माफियाओं का दबदबा है।
सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि कभी यह रवीन्द्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद की धरती रही है, लेकिन वर्तमान सरकार के तहत इसकी पहचान प्रभावित हुई है। उन्होंने दुर्गा पूजा और अन्य त्योहारों के आयोजन को लेकर भी राज्य सरकार पर आरोप लगाए।
उन्होंने हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बंगाल दौरे का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार पर प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप लगाया और इसे “संवैधानिक मर्यादा के खिलाफ” बताया।
भाजपा प्रत्याशियों के लिए मांगे वोट
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवारों—अरिजीत रॉय, ध्रुब साहा, निखिल बनर्जी, दिलीप घोष, कलिता माझी और खोकन दास—के पक्ष में मतदान की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा की सरकार बनने पर राज्य में कानून-व्यवस्था सुधरेगी और विकास को नई दिशा मिलेगी।

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच योगी आदित्यनाथ की रैलियों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। उनके भाषणों में जहां एक ओर विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दे प्रमुख रहे, वहीं दूसरी ओर विपक्ष पर तीखे राजनीतिक हमले भी केंद्र में रहे






