कानपुर नगर के थाना नौबस्ता पुलिस और एसटीएफ लखनऊ के आपसी सहयोग से एक बड़ी कार्रवाई में अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लोगों को शेयर ट्रेडिंग में अधिक मुनाफा दिखाकर ठगी करता था। वही जांच में सामने आया है कि मात्र तीन महीनों में गिरोह के एक खाते से करीब 80 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन किया गया।
कानपुर पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के दिशा निर्देशनिसार पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) के कुशल निर्देशन में हुई इस कार्रवाई के बारे में कानपुर पुलिस आयुक्त ने जानकारी देते हुए बताया गया कि थाना नौबस्ता में एक व्यक्ति की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। पीड़ित को फेसबुक के माध्यम से एक लिंक भेजा गया और ‘श्रद्धा शक्ति’ नाम के व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया। वहां शेयर ट्रेडिंग के नाम पर उससे 7 लाख रुपये ठग लिए गए।
विवेचना में पता चला कि ठगी की राशि को कई बैंक खातों में घुमाने के बाद दिल्ली के ‘नेशनल अर्बन कोआपरेटिव बैंक’ के एक खाते (ए.के. ट्रेड लिंक) में डाला गया। इस खाते के खिलाफ देशभर में NCRP पोर्टल पर 600 से अधिक शिकायतें पहले से ही देश भर में दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में इससे जुड़ी 13 एफआईआर पंजीकृत हैं, जिनमें कुल 26 करोड़ रुपये की ठगी का पता चला है। पुलिस आयुक्त ने यह भी बताया कि यह शातिर अपराधी फर्जी जीएसटी नंबर के जरिए बैंकों में फर्जी करेंट अकाउंट खुलवाते थे जिसमें डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से भी पैसा जमा करते थे।
पुलिस टीम ने पंजाब के फाजिल्का जिले के अबोहर क्षेत्र में दबिश देकर करण कसेरा (31) जो बिजली मैकेनिक का काम और गुलशन कुमार (29) ऑटो पार्ट्स का काम करता था को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि खाता ‘अजय कुमार’ (जो पहले दिल्ली पुलिस द्वारा जेल भेजा जा चुका है और पेशे से मोची है) के नाम पर खुलवाया गया था, लेकिन उसे करण और गुलशन संचालित कर रहे थे। ये लोग ‘लिटिल मोंगा’ और ‘कालरा’ के निर्देशन में काम करते थे, जिनकी तलाश पुलिस अभी भी कर रही है।
गिरोह टेलीग्राम चैनल और व्हाट्सएप के जरिए पैसे दोगुने-तीन गुने करने का झांसा देकर ठगी करता था। डिजिटल जांच में विदेशी नंबरों के जरिए संचालित इस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस को आरोपियों से पूछताछ में जानकारी मिली है कि आरोपियों के खिलाफ आयकर विभाग ने भी नोटिस भी जारी किया हुआ है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो आईफोन, चेकबुक, एटीएम कार्ड, लेन-देन के दस्तावेज और 8,500 रुपये नकद बरामद किए हैं। इस मामले में बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। जिसकी जांच अभी जारी है, फरार अन्य आरोपियों की तलाश अभी भी जारी है।






