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“मोबाइल बना मासूमों का दुश्मन! 3 साल की बच्ची ने खोया मानसिक संतुलन, 13 घंटे तक चलाती थी फोन”

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मोबाइल फोन जिसने जिंदगी को आसान बनाया, वही अब छोटे बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मोबाइल की लत ने दो मासूम बच्चियों का बचपन छीन लिया। महज 3 साल की बच्ची घंटों मोबाइल चलाते-चलाते मानसिक रूप से असामान्य व्यवहार करने लगी। हालत यह है कि फोन छीनने पर बच्ची रोने-चिल्लाने के साथ मारपीट तक करने लगती है। क्या है पूरा मामला, देखिए यह रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जनपद के राठ कस्बे से मोबाइल एडिक्शन का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां खुशीपुरा इलाके में रहने वाली दो मासूम बच्चियां मोबाइल फोन की ऐसी लती हो गईं कि परिवार की चिंता बढ़ गई।

पिता मुबीन अहमद का बयान

पीड़ित पिता मुबीन अहमद के मुताबिक उनकी 3 वर्षीय बेटी आयशा दिन में करीब 13 घंटे मोबाइल फोन चलाती है। हालत यह हो गई कि मोबाइल न मिलने पर बच्ची अपना आपा खो बैठती है, जोर-जोर से रोती है, छटपटाती है और माता-पिता से झगड़ा करने लगती है।

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परिजनों का कहना है कि बच्ची की मोबाइल की लत इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि रात में माता-पिता के सो जाने के बाद भी वह पिता की उंगली लगाकर मोबाइल का लॉक खोल लेती है और देर रात तक फोन चलाती रहती है।इतना ही नहीं, बड़ी बहन को मोबाइल चलाते देखकर 2 वर्षीय छोटी बहन खुशी भी मोबाइल की आदी हो गई है। पिता का दावा है कि ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल की वजह से बड़ी बेटी आयशा का मानसिक संतुलन भी बिगड़ने लगा है। बच्ची अकेले दीवारों और कूलर से बातें करने लगी है।परिवार बच्चियों की हालत से परेशान होकर उन्हें राठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की सलाह दी।

डॉक्टर ब्रजेंद्र राजपूत का बयान

डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र में लंबे समय तक मोबाइल और स्क्रीन देखने से बच्चों के मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है। इससे बच्चे जिद्दी, चिड़चिड़े और आक्रामक हो सकते हैं।मोबाइल फोन आज जरूरत जरूर बन चुका है, लेकिन अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए तो यही मोबाइल छोटे बच्चों के बचपन और मानसिक स्वास्थ्य का सबसे बड़ा दुश्मन भी बन सकता है।

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