सहारनपुर में उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया, जब कैराना लोकसभा सीट से सांसद इकरा हसन पुलिस प्रशासन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हुए थाना सदर बाजार में धरने पर बैठ गईं। मामला शामली जिले के कैराना क्षेत्र के गांव दसाला में हुए चर्चित मोनू हत्याकांड से जुड़ा है, जिसमें पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहा है।

बताया जा रहा है कि गांव दसाला निवासी मोनू, जो कश्यप समाज से ताल्लुक रखता था, उसकी कुछ समय पहले बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को जेल भेज दिया है, लेकिन मृतक के परिजन अब भी पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं हैं। परिवार का आरोप है कि असली साजिशकर्ताओं और अन्य आरोपियों को जानबूझकर बचाया जा रहा है।इसी मुद्दे को लेकर सांसद इकरा हसन खुद मृतक की बुजुर्ग मां और कुछ ग्रामीणों के साथ सहारनपुर स्थित डीआईजी कार्यालय पहुंचीं। वहां उन्होंने डीआईजी अभिषेक सिंह से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई। लेकिन सांसद का आरोप है कि अधिकारियों ने पीड़ित परिवार की बात गंभीरता से सुनने के बजाय उन्हें अपमानित किया।

इकरा हसन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बुजुर्ग मां अपने बेटे के लिए न्याय मांग रही थी, लेकिन प्रशासन ने उनकी भावनाओं को समझने के बजाय उन्हें दफ्तर से बाहर निकाल दिया। सांसद ने आरोप लगाया कि महिला रोते हुए बाहर आई और पुलिस का रवैया पूरी तरह असंवेदनशील था।सांसद के मुताबिक, जब वे लोग डीआईजी कार्यालय के बाहर पार्किंग क्षेत्र में खड़े होकर आगे की कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र तैयार कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस ने आरोप लगाया कि सांसद और उनके समर्थकों ने सड़क जाम कर ट्रैफिक बाधित किया है। हालांकि इकरा हसन ने इस आरोप को पूरी तरह झूठा बताते हुए कहा कि उनके पास पूरा वीडियो फुटेज मौजूद है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि वे सड़क पर नहीं बल्कि पार्किंग एरिया में मौजूद थे।
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इसके बाद पुलिस ने सांसद इकरा हसन को हिरासत में लेकर महिला थाने भेज दिया, जबकि उनके साथ आए पीड़ित परिवार के कुछ सदस्यों और समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं को धारा 151 के तहत चालान कर जेल भेज दिया गया। जैसे ही सांसद को इस कार्रवाई की जानकारी मिली, उनका गुस्सा फूट पड़ा और वह समर्थकों के साथ थाना सदर बाजार पहुंच गईं।थाने में सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच जमकर तीखी बहस हुई। इस दौरान इकरा हसन ने एसपी सिटी से नाराजगी जताते हुए कहा — “अगर न्याय मांगना अपराध है, तो मुझे भी जेल भेज दो या गोली मार दो।” उन्होंने साफ कहा कि जब तक पीड़ित परिवार और कार्यकर्ताओं को रिहा नहीं किया जाएगा, तब तक वह थाने से नहीं हटेंगी।

सांसद ने पुलिस प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पीड़ितों की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है और न्याय मांगने वालों को ही अपराधी की तरह पेश किया जा रहा है।फिलहाल देर रात तक थाना सदर बाजार में हाई-वोल्टेज ड्रामा जारी रहा। भारी संख्या में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक थाने के बाहर जमा रहे, जबकि पुलिस के आला अधिकारी सांसद को समझाने में जुटे रहे। पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।






