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सम्राट चौधरी: बिहार की राजनीति में उभरा बीजेपी का नया चेहरा

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बिहार की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में जिस नेता का राजनीतिक कद सबसे तेजी से बढ़ा है, उनमें सम्राट चौधरी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, कभी क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित रहने वाले सम्राट चौधरी आज बिहार की सत्ता के केंद्र में हैं और बीजेपी के बड़े ओबीसी चेहरे के रूप में उभर चुके हैं, उनका राजनीतिक सफर संघर्ष, विवाद, दल-बदल और लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों से होकर गुजरा है।

मुंगेर के लखनपुर गांव से शुरू हुई कहानी

16 जनवरी 1968 को बिहार के मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में जन्मे सम्राट चौधरी का असली नाम राकेश कुमार है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं, राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े सम्राट चौधरी ने शुरुआती दिनों से ही राजनीति को करीब से देखा और समझा।

1990 में राजनीति में रखा पहला कदम

सम्राट चौधरी ने वर्ष 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा, उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से हुई। साल 1999 में वे राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने हालांकि, मंत्री बनने के तुरंत बाद वे विवादों में घिर गए, कम उम्र में मंत्री बनाए जाने को लेकर सवाल उठे और कुछ महीनों बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा, लेकिन यही वह दौर था, जहां से उनके लंबे राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत हुई।

आरजेडी से जेडीयू और फिर बीजेपी तक का सफर

सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा रहा। उन्होंने पहले लालू यादव की आरजेडी में काम किया, फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) का हिस्सा बने और आखिरकार 2017 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए, बीजेपी में आने के बाद उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर गया, पार्टी ने उन्हें पहले प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया, फिर विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी, इसके बाद वे बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने और धीरे-धीरे पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए।

उप मुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री तक का सफर

2024 में जब नीतीश कुमार ने आरजेडी गठबंधन छोड़कर एनडीए में वापसी की, तब सम्राट चौधरी पहली बार बिहार के उप मुख्यमंत्री बने, इसके बाद 2025 के चुनाव में बीजेपी के मजबूत प्रदर्शन के बाद वे दोबारा डिप्टी सीएम बने और गृह मंत्रालय जैसी अहम जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गईगृह विभाग लंबे समय तक नीतीश कुमार के पास रहा था, इसलिए यह फैसला राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना गया, अब सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार की राजनीति में बीजेपी की नई रणनीति और भविष्य की दिशा का संकेत माना जा रहा है।

भगवा पगड़ी बनी राजनीतिक पहचान

सम्राट चौधरी की भगवा पगड़ी, जिसे बिहार में “मुरैठा” कहा जाता है, उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान बन चुकी है, उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह संकल्प लिया था कि जब तक बिहार में बीजेपी मजबूत स्थिति में नहीं आ जाती और नीतीश कुमार सत्ता से नहीं हटते, तब तक वे अपनी भगवा पगड़ी नहीं उतारेंगे, आज वही मुरैठा बिहार की राजनीति का चर्चित प्रतीक बन चुका है और उनके समर्थकों के बीच एक राजनीतिक संदेश की तरह देखा जाता है।

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ओबीसी राजनीति का बड़ा चेहरा

सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं। बिहार की राजनीति में कुर्मी-कोइरी समीकरण हमेशा से बेहद प्रभावशाली रहा है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी पकड़ ओबीसी और अति पिछड़ा वर्ग में मजबूत होती जा रही है, यही वजह है कि बीजेपी उन्हें बिहार में “सोशल इंजीनियरिंग” के बड़े चेहरे के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

विवादों से भी रहा नाता

सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा, कम उम्र में मंत्री बनने का विवाद, शैक्षणिक डिग्री को लेकर उठे सवाल, चुनावी हलफनामों में अलग-अलग जानकारी और कई बार उनकी आक्रामक बयानबाजी चर्चा का विषय बनी हालांकि, इन विवादों का उनके राजनीतिक प्रभाव पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। उन्होंने 2020 और 2025 दोनों चुनाव तारापुर सीट से जीते और खुद को मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में स्थापित किया।

क्या बिहार में शुरू होगा “सम्राट मॉडल”?

अब बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सम्राट चौधरी बीजेपी के स्थायी चेहरे के रूप में स्थापित होंगे? क्या आने वाले समय में “नीतीश मॉडल” की जगह “सम्राट मॉडल” देखने को मिलेगा? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी अब बिहार में केवल सहयोगी दल की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि खुद नेतृत्व की राजनीति करना चाहती है, ऐसे में सम्राट चौधरी का उभार पार्टी की लंबी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति अब एक नए मोड़ पर खड़ी है। सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा और आने वाले चुनावी समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है।