“राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह जैसे ही उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए, वैसे ही सियासी गलियारों में घमासान मच गया। सवाल उठने लगे कि आखिर आम कार्यकर्ता कब तक दरी बिछाएगा और नेताओं के बेटे ही बड़े पद पाते रहेंगे? क्या यह परिवारवाद है या फिर वर्षों की संगठनात्मक मेहनत का इनाम?”

राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह को उत्तर प्रदेश बीजेपी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विरोधी इसे परिवारवाद का उदाहरण बताते हुए राजनाथ सिंह के पुराने बयान सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं, जिनमें वे परिवारवाद की आलोचना करते नजर आते हैं।वहीं समर्थकों का कहना है कि नीरज सिंह कोई अचानक राजनीति में नहीं आए हैं। उनका दावा है कि 2014 से लेकर 2026 तक नीरज सिंह बिना किसी बड़े पद के लखनऊ में लगातार संगठन के लिए सक्रिय रहे हैं और बीजेपी के कार्यक्रमों में उनकी मजबूत मौजूदगी रही है। हालांकि आलोचकों का तर्क है कि उनकी लोकप्रियता और पहुंच का बड़ा कारण उनके पिता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बड़े भाई, विधायक पंकज सिंह का राजनीतिक प्रभाव भी है।राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जब तक पंकज सिंह नोएडा से विधायक हैं और राजनाथ सिंह लखनऊ से सांसद हैं, तब तक नीरज सिंह को शायद चुनावी राजनीति में मौका न मिले. लेकिन भविष्य में जब राजनाथ सिंह चुनावी राजनीति से अलग होंगे, तो लखनऊ की प्रतिष्ठित लोकसभा सीट या किसी विधानसभा सीट पर नीरज सिंह की दावेदारी को बहुत बड़ा बल मिला है. और राजनाथ की विरासत को संभाल सकते है ,, ऐसे में सवाल यही है कि क्या नीरज सिंह की यह नियुक्ति उनकी राजनीतिक मेहनत का परिणाम है, या फिर परिवारवाद पर उठ रहे सवालों को और मजबूत करती है?






