शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके का एक बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, एक इंटरव्यू के दौरान दिपके ने कहा, “अगर मैं खालिद होता या मुसलमान होता, तो अब तक मैं जेल में होता। इसकी मुझे जानकारी है,” इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और बहस तेज हो गई है।
जंतर-मंतर पर छात्रों के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन
अभिजीत दिपके नीट पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े कथित मामलों, एसएससी परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों की अन्य समस्याओं को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं, उनके आंदोलन को कई युवाओं, छात्रों और विभिन्न सामाजिक समूहों का समर्थन मिल रहा है, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद्सो नम वांगचुक भी इस आंदोलन के समर्थन में पहुंचे हैं और उन्होंने छात्रों के मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की है।
छात्रों की मौत का मुद्दा उठाया
दिपके ने प्रदर्शन के दौरान उन छात्रों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े तनाव के बीच अपनी जान गंवाई, उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में पीड़ित परिवारों के प्रति सरकार ने पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाई, उन्होंने कहा कि कई परिवार अब भी न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनके अनुसार सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने या संवेदना व्यक्त करने नहीं पहुंचा।
सरकार से की यह मांग
अभिजीत दिपके ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनसे मिलकर संवेदना व्यक्त की जानी चाहिए उनके मुताबिक, भले ही खोए हुए बच्चों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन प्रभावित परिवारों के प्रति सहानुभूति और जवाबदेही दिखाना सरकार की जिम्मेदारी है।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
दिपके के “अगर मैं मुस्लिम होता…” वाले बयान के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है, कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्याय व्यवस्था के संदर्भ में देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे विवादित और राजनीतिक टिप्पणी मान रहे हैं फिलहाल, इस बयान पर संबंधित सरकारी पक्ष या अन्य संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।






