लोधी समाज किसके साथ? योगी-अखिलेश आमने-सामने, जयंती पर दिखा सियासी शक्ति प्रदर्शन
लोधी समाज किसके साथ? यही सवाल आज उत्तर प्रदेश की सियासत में सबसे बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है। वजह है वीरांगना अवंती बाई लोधी की जयंती, जिसने एक ही दिन में बीजेपी और समाजवादी पार्टी को आमने-सामने ला खड़ा किया।
अवंती बाई लोधी की जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत बीजेपी के तमाम बड़े नेता लखनऊ में उनकी प्रतिमा पर पहुंचे और माल्यार्पण कर वीरांगना की वीरता को याद किया। लेकिन योगी के वहां से निकलते ही सियासी तस्वीर बदल गई। समाजवादी पार्टी का भी बड़ा हुजूम उसी प्रतिमा के पास पहुंच गया। एक तरफ बीजेपी जिंदाबाद के नारे गूंज रहे थे, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी जिंदाबाद के नारों से माहौल गरमा गया।
अखिलेश यादव ने भी अवंती बाई लोधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनकी वीरता को याद करते हुए लोधी समाज को बड़ा सियासी संदेश दिया दरअसल, 2027 के चुनाव से पहले लोधी समाज को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच खींचतान तेज हो गई है। लोधी समाज को उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली पिछड़ा वर्ग माना जाता है और 70 से 80 सीटों पर लोधी समाज का दब दबा है
यही वजह है कि बीजेपी किसी भी कीमत पर इस वोट बैंक पर अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहती, जबकि अखिलेश यादव की कोशिश है कि पीडीए के साथ लोधी समाज को भी मजबूती से जोड़ा जाए। बीजेपी की ताकत फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लोधी प्रभाव वाले कई इलाकों में मजबूत संगठन और राजनीतिक पकड़ है। लेकिन समाजवादी पार्टी भी लगातार पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने में जुटी है।
ऐसे में अवंती बाई लोधी की जयंती पर एक ही प्रतिमा के सामने बीजेपी और सपा का शक्ति प्रदर्शन साफ संकेत दे रहा है—2027 में लोधी समाज का वोट सिर्फ वोट नहीं, बल्कि सत्ता की चाबी साबित हो सकता है। अब बड़ा सवाल यही है कि अवंती बाई के वंशज आखिर किसका राजतिलक करेंगे—योगी का या अखिलेश का?