बाराबंकी में हंसराज हत्याकांड के बाद सियासत भी गरमा गई है। कोठी थाना क्षेत्र में मामूली विवाद में अति निर्धन परिवार के कमाऊ सदस्य हंसराज वर्मा की जघन्य हत्या ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। इसी बीच पीड़ित परिवार का हाल जानने पहुंचे भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल और क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी ने परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद भाजपा जिला कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रकाश पाल ने कहा कि हंसराज वर्मा परिवार के मुखिया और एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनके जाने के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

परिवार के पास महज चार बिस्वा भूमि है और बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक की जिम्मेदारी अब बड़ी चुनौती है।प्रकाश पाल ने कहा कि भाजपा पीड़ित परिवार को अकेला नहीं छोड़ेगी। बच्चियों की पढ़ाई समेत परिवार की जरूरी जरूरतों में पार्टी हर संभव सहयोग करेगी। उन्होंने बताया कि गुरुवार को पार्टी की ओर से परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक मदद भी दी गई है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी घटना पर गहरा दुख जताया है। बीमारी के चलते दिल्ली में होने के कारण वह स्वयं नहीं पहुंच सके, लेकिन उनके निर्देश पर परिवार की स्थिति की जानकारी ली गई है।

स्वस्थ होने के बाद वह भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचेंगे।हत्याकांड की कार्रवाई को लेकर प्रकाश पाल ने कहा कि मामले में पांच आरोपियों में से चार को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए भाजपा पीड़ित परिवार के साथ खड़ी रहेगी।वहीं, प्रेसवार्ता में सपा के PDA अभियान पर भी प्रकाश पाल ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चार बार सत्ता में रह चुकी समाजवादी पार्टी का नाम जनता के बीच बदनाम हो चुका है, इसलिए अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव नए नाम और नए चेहरे के साथ जनता के बीच जाने की कोशिश कर रहे हैं।प्रकाश पाल ने PDA के अलग-अलग अर्थ गिनाते हुए समाजवादी पार्टी पर तंज कसा।

उन्होंने कहा कि सपा का पुराना ब्रांड जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो चुका है, इसलिए PDA के नाम से नया राजनीतिक नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश हो रही है।हंसराज हत्याकांड के बहाने भाजपा ने जहां पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने का संदेश दिया, वहीं PDA को लेकर सपा पर हमला बोलकर यह भी साफ कर दिया कि 2027 की सियासी जंग में सामाजिक समीकरणों की लड़ाई के साथ-साथ नैरेटिव की लड़ाई भी तेज होने वाली है।