बिहार के लखीसराय में भगदड़ के बीच आठ लोगों की मौत की खबर के बाद अब कटिहार से भी दर्दनाक हादसा सामने आया है, सावन की तीसरी सोमवारी पर फलका थाना क्षेत्र में कमला नदी में नहाने और जल भरने के दौरान सात बच्चे गहरे पानी में चले गए, हादसे में तीन बच्चों की मौत हो गई, जबकि चार बच्चों को ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
नहाने और जल भरने के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, सावन की सोमवारी के अवसर पर श्रद्धालु कमला नदी से जल भरकर स्थानीय शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं, इसी दौरान सात बच्चे नदी में नहाने और डुबकी लगाने के लिए गए थे, नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ था, इसी दौरान बच्चों का पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में चले गए, आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया और चार बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया हालांकि, तीन बच्चे काफी देर तक पानी में फंसे रहे, उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
तीन बच्चों की हुई मौत
हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की पहचान 13 वर्षीय सत्यम कुमार, 9 वर्षीय दिव्यांशु कुमार और 11 वर्षीय अमन कुमार के रूप में हुई है, डॉ. पूजा कुमारी के अनुसार, तीनों बच्चों को अस्पताल लाया गया था, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी, प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, तीनों की मौत डूबने के कारण हुई। बताया गया कि बच्चे करीब आधे घंटे तक पानी के अंदर रहे थे, हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया। गांव में भी मातम का माहौल है।
परिजन ने बताया कैसे हुआ हादसा
मृतकों में से एक बच्चे के चाचा ने बताया कि सावन की हर सोमवारी पर श्रद्धालु कमला नदी से जल भरकर स्थानीय शिव मंदिर में पूजा करते हैं, पिछले दो सोमवार को नदी में पानी कम था, लेकिन इस बार जलस्तर बढ़ गया था, परिजन के मुताबिक, पानी बढ़ने के कारण नदी का गहरा हिस्सा बच्चों के लिए खतरनाक हो गया, इसी दौरान बच्चों का पैर फिसला और वे गहरे पानी में चले गए।
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ग्रामीणों ने प्रशासन पर उठाए सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने नदी घाट पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सोमवारी के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे, ग्रामीण राजेश कुमार ने कहा कि घाट पर न तो पर्याप्त सुरक्षाकर्मी मौजूद थे और न ही गोताखोर या बैरिकेडिंग की व्यवस्था थी वहीं, ग्रामीण संजय मंडल ने बताया कि जलस्तर बढ़ने के बाद नदी का गहरा हिस्सा काफी खतरनाक हो गया था, बच्चों को उस हिस्से में जाने से रोकने के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई थी, ग्रामीण मुकेश कुमार ने प्रशासन से मांग की कि धार्मिक अवसरों पर नदी और अन्य जलाशयों के घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
हादसे के बाद प्रशासन पर बढ़े सवाल
सावन की सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के नदी घाटों पर पहुंचने के बावजूद सुरक्षा इंतजामों को लेकर उठे सवालों ने प्रशासन की तैयारियों पर चर्चा तेज कर दी है, इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर धार्मिक आयोजनों और नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है, स्थानीय लोगों ने प्रशासन से घाटों पर बैरिकेडिंग, सुरक्षाकर्मियों और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती की मांग की है।