अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता मामले में उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने विशेष जांच दल यानी SIT की अंतिम रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। रिपोर्ट में आवश्यक कार्रवाई के लिए आगे की प्रक्रिया का संकेत दिया गया है। हालांकि, SIT की फाइनल रिपोर्ट में किन-किन लोगों के नाम शामिल हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
चंपत राय के नाम को लेकर क्या है स्थिति?
मामले की शुरुआती जांच रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम शामिल नहीं था। अब फाइनल रिपोर्ट में भी उनका नाम नहीं होने की चर्चा है। हालांकि, रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।दूसरी ओर, ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया था। अंतिम रिपोर्ट में उनके नाम को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी साफ नहीं है कि जांच के दौरान कोई नया साक्ष्य सामने आया या किन आधारों पर किसी नाम को रिपोर्ट में शामिल या बाहर किया गया।
जून में हुआ था SIT का गठन
इस पूरे मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को विशेष जांच दल का गठन किया था। बताया गया कि ट्रस्ट के अनुरोध के बाद राज्य सरकार ने यह कदम उठाया। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय SIT बनाई गई थी। इसमें आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव वित्त नील रतन कुमार को सदस्य बनाया गया था।SIT ने 23 जून को शासन को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
25 जून को दर्ज हुई थी पहली FIR
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि थाने में इस मामले की पहली FIR दर्ज की गई थी। ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज FIR में आठ लोगों को नामजद किया गया था, जबकि कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया।नामजद आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्री राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल थे।आरोपियों के खिलाफ BNS और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अब सार्वजनिक रिपोर्ट पर नजर
SIT की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट और शासन स्तर पर पहुंचने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में किन लोगों की भूमिका सामने आई और किन आरोपों को सही या गलत पाया गया। रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रारंभिक जांच के मुकाबले अंतिम निष्कर्ष में क्या बदलाव हुए हैं।राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे का मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण इस रिपोर्ट पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ श्रद्धालुओं और आम लोगों की भी नजर है। फिलहाल अंतिम रिपोर्ट के आधिकारिक विवरण का इंतजार किया जा रहा है।