फर्रुखाबाद। जिले में गंगा और रामगंगा नदी के जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन के मुताबिक, वर्तमान में सदर, अमृतपुर और कायमगंज तहसीलों के 63 गांव, आंशिक आबादी और कृषि क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हैं।
19 अगस्त को नरोरा बैराज से गंगा नदी में 1,15,137 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पांचाल घाट पर गंगा का जलस्तर 136.85 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 137.10 मीटर से नीचे है। वहीं रामगंगा नदी में 75,445 क्यूसेक पानी पास हुआ और रामगंगा सेतु पर जलस्तर भी खतरे के निशान से नीचे है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिले में 24 अस्थाई बाढ़ शरणालय और 52 बाढ़ चौकियां संचालित की जा रही हैं। इनमें राजस्व, पंचायती राज, ग्राम विकास, चिकित्सा और पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सदर, अमृतपुर और कायमगंज तहसीलों में एक-एक मॉडल बाढ़ शरणालय भी तैयार किया गया है, जहां बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास, मनोरंजन कक्ष और खेलकूद की व्यवस्था है।
खोज एवं बचाव कार्य के लिए 191 निजी नाव और नाविक तथा 53 प्रशिक्षित गोताखोर सेफ्टी किट के साथ उपलब्ध हैं। प्रशासन के पास लाइफ जैकेट, लाइफ रिंग, सर्च लाइट, हेलमेट, रेनकोट, मेगाफोन और रस्सियों समेत जरूरी राहत सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे संचालित किए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग ने 17 मेडिकल टीमें गठित की हैं। प्रभावित गांवों में अब तक 144 मेडिकल कैंप लगाए गए, जहां 8,073 लोगों का उपचार किया गया। 10,413 ओआरएस पैकेट और 9,063 क्लोरीन टैबलेट वितरित किए गए हैं। पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम और अन्य जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
पशु चिकित्सा विभाग ने छह टीमें और 14 अस्थाई पशु शरणालय स्थापित किए हैं। 54 पशु चिकित्सा शिविरों में 3,273 पशुओं का उपचार और 7,237 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। पशु राहत शिविरों में 120 कुंतल भूसे का वितरण भी किया गया है।
कृषि विभाग की ओर से बाढ़ प्रभावित किसानों को धान की सहनशील प्रजाति आईआर-64 सब-1 उपलब्ध कराई गई है। यह प्रजाति 14 दिन तक जलभराव सहन करने में सक्षम बताई गई है और करीब 200 एकड़ क्षेत्र में इसकी खेती की गई है। सिंचाई विभाग ने गंगा और रामगंगा के कटाव से सुरक्षा के लिए 12.15 करोड़ रुपये की लागत से चार परियोजनाओं में परकोपाइन और स्क्रीन संबंधी कार्य कराए हैं।
प्रशासन के मुताबिक बाढ़ प्रभावित गांवों में 10,621 परिवारों को सूखा खाद्यान्न पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 661 लोगों को सुरक्षित निकालकर बाढ़ शरणालयों में रखा गया है, जहां उन्हें प्रतिदिन नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 7,939 पके भोजन के पैकेट वितरित किए गए हैं।
बाढ़ के कारण जिले में 50,775 लोग प्रभावित हुए हैं। 2,881.8 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है। वहीं 21 परिवारों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें गृह अनुदान के रूप में 25.20 लाख रुपये वितरित किए जा चुके हैं। पानी उतरने के बाद कृषि विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम फसलों के नुकसान का सर्वे कर पात्र किसानों को कृषि निवेश अनुदान उपलब्ध कराएगी।
बाढ़ के कारण जिन परिवारों के आशियाने कट गए हैं, उन्हें आवासीय पट्टा देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। सदर तहसील के ग्राम दिलीप की मड़ैया के 25 परिवारों को आवासीय पट्टे वितरित किए गए हैं, जबकि 21 परिवारों के खातों में पट्टे की धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
जिला प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत और पुनर्वास के लिए सभी संबंधित विभागों को लगातार सक्रिय रखा गया है और स्थिति पर 24 घंटे निगरानी की जा रही है।