मथुरा। लोक निर्माण विभाग (PWD) मथुरा में रॉयल्टी को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग मथुरा में काम कर रही एक निर्माण फर्म ने आरोप लगाया है कि भुगतान के दौरान जमा की गई उसकी रॉयल्टी को कथित तौर पर निर्माण खंड-1 के पोर्टल पर किसी अन्य फर्म के नाम से दर्ज कर दिया गया।फर्म का दावा है कि इस तरह करीब 37 लाख रुपये की रॉयल्टी (रमन्ना) दूसरे ठेकेदारों के नाम चढ़ा दी गई और बाद में उसके बिलों से रॉयल्टी की कथित तौर पर कई गुना राशि काटी गई।
नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप संबंधित फर्म की ओर से बताए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विभाग की ओर से आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।
प्रांतीय खंड में चल रहे प्रोजेक्ट की रॉयल्टी निर्माण खंड-1 में चढ़ाने का आरोप
जानकारी के मुताबिक, मैसर्स आरपी इंफ्रावेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा मथुरा-गोवर्धन-डीग मार्ग के फोरलेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जा रहा है।इसके अलावा कोसी-नंदगांव-सौंख-मथुरा-राया अप टू यमुना एक्सप्रेसवे मार्ग के फोरलेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य भी फर्म द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है।फर्म का आरोप है कि इन परियोजनाओं से संबंधित रॉयल्टी भुगतान के दौरान नियमानुसार जमा की जाती रही, लेकिन बाद में करीब 8 से 10 बार की रॉयल्टी को कथित तौर पर निर्माण खंड-1 के पोर्टल पर अन्य ठेकेदारों के नाम दर्ज कर दिया गया।
फर्म का आरोप- बिलों से छह गुना रॉयल्टी काटी गई
फर्म के मुताबिक, जब उसने अपने रॉयल्टी रिकॉर्ड की जानकारी विभाग से ली तो कथित गड़बड़ी का पता चला।आरोप है कि फर्म द्वारा पहले ही जमा की गई रॉयल्टी को दूसरे ठेकेदारों के नाम चढ़ाने के बावजूद उसके बिलों से दोबारा रॉयल्टी की राशि काटी गई। फर्म का दावा है कि कुछ मामलों में रॉयल्टी की करीब छह गुना राशि उसके बिलों से काटी गई।इस मामले में फर्म ने विभागीय रिकॉर्ड और पोर्टल पर दर्ज विवरण की जांच कराने की मांग की है।
9 दिसंबर 2024 को विभाग को दी गई थी शिकायत
फर्म के प्रोजेक्ट मैनेजर के मुताबिक, इस मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों को कई बार पत्र भेजकर शिकायत की गई।फर्म की ओर से बताया गया है कि 9 दिसंबर 2024 को भी पत्र के माध्यम से विभाग को मामले से अवगत कराया गया था। प्रोजेक्ट मैनेजर का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
अब कोर्ट जाने की तैयारी में फर्म
फर्म के प्रोजेक्ट मैनेजर ने कहा कि रॉयल्टी से जुड़े कथित घपले को लेकर कई बार अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन कोई ठोस संज्ञान नहीं लिया गया।उनका कहना है कि यदि मामले में विभागीय स्तर पर समाधान नहीं हुआ तो फर्म न्यायालय की शरण लेगी।फर्म की ओर से निर्माण खंड-1 के अधिशासी अभियंता की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारी या लोक निर्माण विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
रॉयल्टी रिकॉर्ड और पोर्टल की जांच से सामने आ सकता है सच
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि यदि फर्म ने नियमानुसार रॉयल्टी जमा की थी तो उसके रिकॉर्ड किस प्रकार और किस प्रक्रिया के तहत दूसरे खंड के पोर्टल पर किसी अन्य फर्म के नाम दर्ज हुए।मामले की निष्पक्ष जांच के लिए रॉयल्टी की मूल रसीदें, रमन्ना, भुगतान बिल, विभागीय रिकॉर्ड और पोर्टल पर दर्ज विवरण का मिलान महत्वपूर्ण होगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि रॉयल्टी की एंट्री में गलती हुई या जानबूझकर किसी अन्य फर्म के नाम दर्ज की गई।