कभी मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी और ‘मिनी मुख्यमंत्री’ के नाम से पहचाने जाने वाले पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक का सियासी सफर अब उम्रकैद की सजा पर आकर ठहर गया है। औरैया के चर्चित दोहरे हत्याकांड में एमपी-एमएलए कोर्ट ने कमलेश पाठक, उनके भाई संतोष पाठक, रामू पाठक समेत सभी 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सभी पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। वर्ष 1985 में महज 28 साल की उम्र में विधायक बनने वाले कमलेश पाठक ने मुलायम सिंह यादव की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद वह सपा में बेहद प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे। एमएलसी और राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के साथ उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया।
लेकिन औरैया जिले की बहाली को लेकर मुलायम सिंह यादव के खिलाफ काले झंडे दिखाने से लेकर बाद में दोहरे हत्याकांड में नाम आने तक उनके राजनीतिक सफर में कई बड़े मोड़ आए। कभी कमलेश पाठक के बेहद करीबी रहे मंजुल चौबे से बाद में उनकी दुश्मनी हो गई। हनुमान मंदिर की जमीन को लेकर विवाद ने दोनों के रिश्ते और बिगाड़ दिए। 15 मार्च 2020 को दोहरे हत्याकांड में नाम सामने आने के बाद कमलेश पाठक जेल चले गए।
अब अदालत के फैसले के बाद उनके सियासी रसूख का दौर पूरी तरह अतीत बन चुका है। दोषियों के कोर्ट में रोने के बीच पीड़ित परिवार ने फैसले को न्याय की बड़ी जीत बताया है।
कभी सत्ता के गलियारों में मजबूत पकड़ रखने वाले कमलेश पाठक की कहानी अब राजनीति से निकलकर कानून के फैसले तक पहुंच चुकी है। औरैया का यह फैसला उनके लंबे सियासी सफर का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ साबित हुआ है।