Home Political news प्रयागराज की प्रतापपुर सीट: जहाँ ‘लहर’ नहीं, समीकरण तय करते हैं जीत-हार

प्रयागराज की प्रतापपुर सीट: जहाँ ‘लहर’ नहीं, समीकरण तय करते हैं जीत-हार

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में अक्सर “लहर” को सबसे बड़ा फैक्टर माना जाता है, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव इसके सबसे बड़े उदाहरण रहे, जब पूरे प्रदेश में एकतरफा माहौल देखने को मिला, लेकिन इस राजनीतिक लहर के बीच प्रयागराज जिले की Pratappur Assembly Constituency सीट ने हर बार एक अलग कहानी लिखी है, यहाँ न तो “मोदी-योगी लहर” का असर दिखा और न ही बड़े मुद्दों का सीधा प्रभाव, इस सीट ने बार-बार साबित किया है कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है, न कि माहौल का।

इतिहास: बार-बार बदला सियासी समीकरण

अगर इस सीट के चुनावी इतिहास पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी दिलचस्प नजर आती है

  • 1996 : समाजवादी पार्टी के जोखू लाल यादव ने जीत दर्ज की
  • 2002 : कांग्रेस के श्याम सूरत उपाध्याय ने बाजी पलटी
  • 2007 और 2012 : समाजवादी पार्टी ने फिर से कब्जा किया
  • 2012 : विजमा यादव ने बसपा के मोहम्मद मुज्तबा सिद्दीकी को 12,808 वोटों से हराया

2017: जब लहर भी नहीं कर पाई असर

2017 में जब पूरे उत्तर प्रदेश में बीजेपी की प्रचंड लहर थी, तब भी प्रतापपुर सीट ने अलग फैसला सुनाया, बसपा के मोहम्मद मुज्तबा सिद्दीकी ने अपना दल (सोनेलाल) के उम्मीदवार को 2,654 वोटों से हराया।

  • बसपा: 66,805 वोट
  • अपना दल: 64,151 वोट
  • सपा तीसरे स्थान पर रही

2022: फिर बदला खेल

2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी की विजमा यादव ने वापसी करते हुए अपना दल (सोनेलाल) के राकेश धर त्रिपाठी को 10,956 वोटों से हराया और सीट पर कब्जा जमाया।

जातिगत गणित: जीत की असली कुंजी

प्रतापपुर सीट का सबसे अहम पहलू इसका जातीय समीकरण है।

यहाँ लगभग:

  • 65 हजार यादव
  • 50 हजार ब्राह्मण
  • 42 हजार पटेल
  • 20 हजार मुस्लिम
  • 17 हजार बिंद
  • 11 हजार बनिया
  • 7 हजार ठाकुर
  • 3 हजार कायस्थ मतदाता

यानी कोई एक वर्ग चुनाव तय नहीं करता। यही वजह है कि यहाँ “लहर” नहीं, बल्कि संतुलन और गठजोड़ जीत तय करते हैं।

2027 पर सबकी नजर

अब 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो चुके हैं
सवाल यही है, क्या इस बार बीजेपी इस सीट पर अपना खाता खोल पाएगी?
या फिर प्रतापपुर की जनता एक बार फिर “लहर” के खिलाफ जाकर नया फैसला सुनाएगी?

निष्कर्ष

प्रयागराज की प्रतापपुर सीट सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है यहाँ हर चुनाव ये साबित करता है कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत न लहर होती है, न नेता… बल्कि जनता का अपना फैसला होता है।

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